कविता
    10 hours ago

    पल दो पल के जीवन में

    __प्रीति चौधरी “मनोरमा” प्रेम की एक कहानी हैपल दो पल के जीवन में,यादें चंद सुहानी…
    कविता
    11 hours ago

    सात घोड़ों वाला देदीप्यमान सूर्य

    __रीमा सिन्हा(लखनऊ) सतरंगी सूर्य को पूजते ऋषि मुनि और देवतागण,परम सौंदर्य से सुरभित होता मनोहर…
    कविता
    11 hours ago

    गुरु वंदना

    __अनुराधा प्रियदर्शिनी संताप मन का मिटे।जब गुरु संग रहे।ज्ञान का दीपक जले।हिय प्रकाशित करे।। सन्मार्ग…
    कविता
    11 hours ago

    स्वास्थ्य ही धन है

    __अलका गुप्ता ‘प्रियदर्शिनी‘ रोग तन का बुरा रोग मन का बुरा, काया को कर निरोगी…
    कविता
    11 hours ago

    पतझड़

    __बृजकिशोरी त्रिपाठी पतझड़ तेरा आना सास्वत है तुम आते हो हर वर्ष।पेडो़ के जीर्ण सीर्ण…
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    11 hours ago

    (जय माँ सरस्वती)

    __ज्ञानेन्द्र पाण्डेय “अवधी-मधुरस” अमेठी श्वेतु परिधानि धारि , श्वेतु हंस पै सवारि ,वीना अंकु माहिं…
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    11 hours ago

    मेरे लिए

    . __बिमल काका गोलछा “हँसमुख” क्यों वक्त इतना सा ही लेकर आये मेरे लिए,चन्द लम्हें…
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    11 hours ago

    कुछ शब्द खोना नहीं पाना चाहता हूं।।

    कैलाश चंद साहू अंधेरी कोठरी सुरंग है गहरीयादों की पटरी बहुत ही पहरीहर शब्द है…
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    11 hours ago

    पर्णकुटी

    राजीव कुमार झा हम खुद कोभीतर – बाहर सेकितना जानतेकई बारअपने आप कोजब ठीक सेपहचानतेतभी…
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    11 hours ago

    बाबू जी का घर

    राजीव कुमार झा इसी घर मेंहमारा जन्म हुआयहां से बच्चेपढ़ने के लिएस्कूल जातेमैंदान में खेलकरघर…
      कविता
      10 hours ago

      पल दो पल के जीवन में

      __प्रीति चौधरी “मनोरमा” प्रेम की एक कहानी हैपल दो पल के जीवन में,यादें चंद सुहानी हैं,पल दो पल के जीवन…
      कविता
      11 hours ago

      सात घोड़ों वाला देदीप्यमान सूर्य

      __रीमा सिन्हा(लखनऊ) सतरंगी सूर्य को पूजते ऋषि मुनि और देवतागण,परम सौंदर्य से सुरभित होता मनोहर वातावरण। ऊर्जा का संचार है…
      कविता
      11 hours ago

      गुरु वंदना

      __अनुराधा प्रियदर्शिनी संताप मन का मिटे।जब गुरु संग रहे।ज्ञान का दीपक जले।हिय प्रकाशित करे।। सन्मार्ग पर ले चले।ईश का बोध…
      कविता
      11 hours ago

      स्वास्थ्य ही धन है

      __अलका गुप्ता ‘प्रियदर्शिनी‘ रोग तन का बुरा रोग मन का बुरा, काया को कर निरोगी संभल जा जरा ।कपट मोह…
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