आलेखसाहित्य

आदिमानव का काल्पनिक चित्रण

__सुषमा श्रीवास्तव,

आधुनिक खोजों से ज्ञात हुआ है कि लाखों वर्ष पूर्व इस पृथ्वी पर मानव का जन्म हुआ था, तो कल्पना की गई होगी कि पहले मनुष्य चार पैरों पर चलता होगा और जंगलों में रहता होगा। वहाँ वह पेड़ों की जड़े ,पत्तियाँ, फल-फूल इत्यादि खाता रहा होगा। कुछ छोटे जानवरों को मारकर उनका कच्चा मांस ही खाता रहा होगा। वस्त्र नहीं पहनता रहा होगा व घूमता रहा होगा ।यह वानर जैसा मानव खाने की तलाश इधर-उधर दिन भर भटकता  हुआ लेकिन रात होने पर जानवरों से सुरक्षा व ठंड व बरसात से बचने के लिए गुफा जैसे स्थान मिलने पर उसमें रहने लगा। लेकिन वह अधिकांशतः पेड़ों पर चढ़कर ही रहता था और इस तरह रात में जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा करता था। संभवतः जब उसने ऊँचाई पर लगे पेड़ों के फलों को देखा होगा तब उनको तोड़ने के लिए वह धीरे-धीरे अपने शरीर को संतुलित करते हुए चार बजाए दो पैरों का उपयोग करने लगा होगा। इस प्रकार उसके दो हाथ स्वतंत्र हो गए होंगे जिनका उपयोग वह धीरे-धीरे किसी चीज को खोजने, पकड़ने व उठाने में करने लगा होगा और इस तरह वह दो पैरों का उपयोग चलने एवं दो हाथों का उपयोग काम करन के लिए करने लगा होगा।इस प्रकार की कल्पना की जा सकती है। इस तरह मनुष्य में धीरे-धीरे शारीरिक परिवर्तन होते गए। जैसे जब वह पैरों पर खड़ा होने लगा तो अधिक दूर तक देखने लगा होगा वह आसपास की चीजों को देखने के लिए पूरे शरीर को घुमाने के बजाय सिर्फ गर्दन का उपयोग करने लगा। हाथों का उपयोग पेड़ों की टहनियाँ पकड़़कर फल तोड़ने, खाना लाने, खाना खाने के लिए करने लगा। इसी समय वह पीठ के बल सोने लगा होगा। इस प्रकार शारीरिक परिवर्तनों के साथ-साथ मानव के सोचने की शक्ति का भी तेजी से विकास होने लगा। उसके स्पष्ट रूप से रोने व हँसने की आवाज में भी अधिक स्पष्टता आती गई होगी।
निरंतर आते परिवर्तनों के द्वारा अब मनुष्य अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे- भोजन, आवास व सुरक्षा के बारे में भी सोचने लगा होगा। भोजन की तलाश में घूमते रहने के साथ-साथ वह भोजन इकट्ठा भी करने लगा और जंगल में जानवरों से बचाव करने के लिए लकड़ी, जानवरों की हड्डियों, सींगों, धारदार नुकीले पत्थरों का उपयोग करने लगा।उपरोक्त तरह के मानव अर्थात आज से लाखों वर्ष पुराने मानव को ही  आदिमानव कहा जाता है।


लेखिका- सुषमा श्रीवास्तव, रुद्रपुर, उत्तराखंड। (काल्पनिक चित्रण)

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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