आलेख

गंभीरता और वैचारिकता से लैस होकर कविताएं लिखनी चाहिए : भगवती प्रसाद द्विवेदी

समाज को आईना दिखलाती है कविता :सिद्धेश्व

दि ग्राम टुडे समाचार
पटना। ऐसी छोटी-छोटी गोष्ठियों में सिर्फ वाहवाही नहीं करनी चाहिए बल्कि जहां छोटी मोटी भूले हो रही हों वहां विचार-विमर्श भी करना चाहिए l निश्चित तौर पर कविता को प्रथमत: कविता ही होना चाहिए, अभिव्यक्ति का माध्यम भले जो भी हो l पूरी गंभीरता और वैचारिकता से लैस होकर कविताएं लिखनी चाहिए l
साहित्यिक संस्था ‘ साहित्य परिक्रमा ‘ के तत्वाधान में आयोजित काव्य संध्या की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने उपरोक्त उद्गार व्यक्त किया l संस्था के अध्यक्ष मधुरेश नारायण ने कहा कि – कवि गोष्ठी का उद्देश्य कविताओं के संदर्भ में आंतरिक विवेचन करना है, कुछ सीखना और कुछ सिखाना है l मधुरेश नारायण के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम को आथित्य प्रदान किया श्रीमती आशा शरण एव॔ श्रीमती बीना गुप्ता ने।
इस सारस्वत काव्य संध्या का संचालन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार सिद्धेश्वर ने कहा कि – कविता हमें सच्चा मनुष्य बनने की राह दिखाती है l समाज को आईना दिखलाती है कविता ! समकालीनता की दौड़ में सामाजिक धरातल पर यथार्थवादी कविता ही प्रासंगिक है !
एक दर्जन से अधिक नए पुराने कवियों ने अपनी प्रतिनिधि गीतों, गजलों एवं नग्मों से समां बांधा l आराधना प्रसाद ने – उम्र भर हम सफर में भटकते रहे,सख़्त दीवारों पर सर पटकते रहे l / भगवती प्रसाद द्विवेदी ने – खरहे – सी भागती उमर, आसरे की डोर कट गई, सूचना तकनीक कंप्यूटर, दुनिया कितनी सिमट गई !/ सुनील कुमार ने – जेहन से घोर अंधेरों को मिटाने के लिए, है चमकता हुआ सूरज मेरे भीतर देखो !/ मधुरेश नारायण ने- चेहरा उदास है माली का, आज फिर एक कली मसल दी गई, भीड़ भरी इस नगरी में फिर एक मासूम कुचल दी गई !/ डॉ एम के मधु ने -युद्ध युद्ध युद्ध तो विरुद्ध क्या है ? युद्ध का विकल्प और बुद्ध क्या है ?
सिद्धेश्वर ने -मुझको अपनी परछाई से, डर लगता है कोई मेरी जिंदगी को आईना दिखला दे l/ विभा रानी श्रीवास्तव ने – चातक चकोर को मदमस्त होते भी सुना है, ज्वार भाटे को उसे देख उफनते भी देखा है l /डॉ सुनील कुमार उपाध्याय ने- अब गजल का सुनाई बड़ा शोर बा,बावे बदरी ना करिया, खड़ा मोर बा !/ रवि श्रीवास्तव ने -, ऐ जिंदगी तेरे सितम तो आते रहेंगे, पर हम भी क्या कम है मुस्कुराते रहेंगे !/ प्रभात कुमार धवन ने – इसलिए बंधु, रोक रोक युद्ध को रोक, और बन जा तू भी अशोक, जयघोष कर पुनः वासुदेव कुटुंबकम !/ नसीम अख्तर ने – मेरा गम जमाने में शाया ना होता, सितम आपने मुझ पर ढाया ना होता l / शुभ चंद्र सिन्हा ने – हुनर पतवार को जी भर सिखाया कर, कभी उसको भंवर के गांव लाया कर ! जैसी जीवंत कविताओं का पाठ किया गया l इनके अतिरिक्त लता प्रासर, डॉ अर्चना त्रिपाठी, उर्मिला वर्मा आदि ने भी कविताओं का पाठ किया l धन्यवाद ज्ञापन किया पंकज श्रीवास्तव ने।

50% LikesVS
50% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!