आलेख

जग क्यूं अनजान है

जीवन से जब तुम दूर चले जाओगे
वापस लौटकर कभी ना पास अओगे
तब तेरी याद जीवन में बहुत रूलायेगी
तेरी अक्स दिल को पल पल तड़पायेगी

क्यूँ जाता है मन जीवन से हार
क्यूँ बन जाता है बेरहम ये संसार
क्यूं ना होता है अपनो को अपनो से प्यार
बेगाना क्यूं बन जाता है नीज परिवार

जब अपना कोई भी टुट जाता है
क्या दिल से भी वो रूठ जाता है
क्यूं नहीं भरता है ये दिल का घाव
क्यूँ पराया सा होता है अपनों का दाव

अपनों को कभी दूर मत जाने दो
रूठा है तो कोशिश मनाने   दो
जग है एक खुशनुमा रंगमंच
दुःखों को करो वापस करो तंज

अपनो को सदैव मन से सम्मान करना
खुशियो का है जीवन में दामन थामना
जग में सब मतलब का है   मेहमान
इस बात से क्यूं जग है अब अनजान

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार
9546115088

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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