आलेख

जीवन के नए रंग

कमला सिंह


छोटे से गांव में एक शालिनी नाम की लड़की रहती थी छोटा सा परिवार बहुत गरीब लेकिन दिल की बहुत अमीर थी क्योंकि उसके दिल मेंसबके प्रति ममता प्रेम इसने है ईश्वर के प्रति श्रद्धा कूट-कूट कर भरी थी जैसे-जैसे बढ़ी हुई घर का पूरा काम संभालने लगे एक छोटी बहन थी भाई था घर की पूरी जिम्मेदारी पूरे घर के काम को मन लगाकर करती थी सूर्योदय पहले उठना बहुत ही संस्कारी लड़की सूर्य को अर्घ देना रात को ही घर का काम करके सो जाती थी सुबह उठती थी चाय बनाना फिर घर का काम करना मां बाप को सेवा करना हर पल खुश रहना नाचते गाते रहना उसके चेहरे में खुशी झलकती थी हर पल खुश रहती थी संतोषी स्वभाव की जो मिल जाता था खुशी के साथ खुश हो जाती थी उसके मां-बाप बहुत चाहते थे शालिनी को मां-बाप को अपने भगवान के जैसे पूजा करना उसका एक नेचर बहुत अजीब था यदि उसके कोई काम में हाथ बटाए तो पसंद नहीं करती थी वो हर काम को अपने तरीके से करना चाहती थी और अपने तरीके से करती थी तो उसे संतुष्टि मिलती थी यदि कोई उसके काम में हाथ बटा दो से डिस्टर्ब हो जाती थी मन मुताबिक उसका काम नहीं हो पाता था तो शालिनी दुखी हो जाती थी ऐसे करते शालिनी जवान हो गई उसके घर में एक रिश्ता आया जो बहुत बड़े घर से था मां बाप गरीब थे मैं अपने लड़की के अलावा कुछ नहीं दे सकता पिता ने कहा हमें कुछ नहीं चाहिए हमें आपकी लड़की चाहिए जो बहुत अच्छी है भगवान के दया से हमारे यहां सब कुछ है शालिनी की शादी हो गई ससुराल वालों ने पूरे खर्च उठाएं उसका पति शालिनी को मानते थेबहुत ज्यादा था क्योंकि शालिनीअपने ससुराल में भी संस्कार को नहीं भूले इतने रईस होने के बावजूद भी वह घर का काम जो भी होता था सारा करती थी पति का सास ससुर का पैर पड़ना उनकी सेवा करना उनका ख्याल करना मां सेउसे शिक्षा मिली थी कि बेटा जन्म देने वाले से बड़ा कर्म देने वाला होता है और धर्म के मां बाप बड़े होते हैं उनको हमसे भी ज्यादा प्यार करना काम करने से शरीर खराब नहीं होता मजबूत होता है यह बात उसके मन में घर कर गई थी और अपने घर का काम ससुराल में सबका ध्यान रखना पूजा-पाठ पति का सेवा करना अपना संस्कार नहीं भूल पाए लेकिन शालिनी को किसी चीज की कमी नहीं थी शालिनी का जीवन बदल गया शालिनी ज्यादा पढ़ी-लिखी तो नहीं थी परंतु उसमें वह सारी समझदारी थी जो एक स्त्री को होनी चाहिए स्त्री का गहना उसकी लज्जा है जो शालिनी मेथी भगवान जो अच्छे होते हैं निश्छल होते निष्कपट होते निष्पाप होते हैं भगवान उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं जो नहीं सोचो वह भी मिल जाता है शालिनी को वह सब मिल गया जिसकी वह कभी कल्पना नहीं की थी उसका जीवन ही बदल गया शालिनी का जीवन एक नए रंग उमंग के साथ बदल गया ईश्वर ऐसे ही हैं सच्चे मन वाले के साथ में अच्छा ही करते हैं

कमला सिंह

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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