आलेखसाहित्य

जीवन क्या है

प्रीति दुबे

जीवन क्या है
जीवन क्या है इस प्रश्न का यदि कोई सटीक उत्तर मिल जाए और मनुष्य के समझ में आ जाए तो संसार के सारे अनुसंधान थम जाएंगे और जीवन जीने का आनंद ही समाप्त हो जाएगा । एक ठहराव सा आ जाएगा। जीवन की व्याख्या हर स्तर पर हुई है ।सामाजिक ,पारिवारिक ,धार्मिक ,और आध्यात्मिक हर दृष्टि से इसे परिभाषित किया गया है और हर व्यक्ति ने अपने अपने स्तर से उसके अर्थ को ग्रहण भी किया है।मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम ने स्वयं मानव अवतार में जीकर आदर्श प्रस्तुत किया तो लीलाधर भगवान कृष्ण ने गीता सार में जीवन और संसार पर एक विस्तृत और सटीक व्याख्या जगत में प्रस्तुत की ,लेकिन प्रभु के दिए हुए ज्ञान को समझने और अपनाने के लिए भी दिव्य ज्ञान की आवश्यकता होती है जो हम साधारण मनुष्य के पास नहीं है ।तो सार तो यही निकलता है कि मानव की देह मिली है सत कर्मों में लगाते हुए, सद्बुद्धि का उपयोग करते हुए और सत्संग करते हुए बस जीवन का आनंद लेते रहे, समय की धारा के साथ बहते रहे ,सुख और दुख को समानता से स्वीकार करते रहें और उस परम शक्ति पर विश्वास रखें जिसने जीवन दिया है क्योंकि आप हम कुछ भी कर ले होई है वही जो राम रचि राखा
प्रीतिमनीष दुबे
मण्डला मप्र

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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