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भारत में मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा का सबसे बड़ा संसाधन है परिवार

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस ( 15 मई ) पर विशेष लेख

डॉ मनोज कुमार तिवारी

परिवार व्यक्तियों का वह समूह है जो विवाह एवं रक्त संबंधों से बनता है। परिवार एक स्थाई एवं सार्वभौमिक संस्था है। परिवार के बिना सभ्य समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। परिवार समाज की आधारभूत इकाई है। परिवार में ही समाजीकरण की प्रक्रिया संपन्न होती है। परिवार अपने सदस्यों को सामाजिक, आर्थिक, सांवेगिक व मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करता है।

परिवार में बच्चों को जीवन व सामाजिक कौशल सीखने का अवसर प्राप्त होता है। शोध में पाया गया है कि संयुक्त परिवार की अपेक्षा एकांकी परिवार के व्यक्तियों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अधिक पाई जाती है। परिवार व्यक्ति के विकास को व्यापक व सतत रूप से प्रभावित करता है। अनेक अध्ययनों में यह देखा गया है कि जिन परिवारों में समायोजन संबंधी समस्याएं होती हैं उन परिवारों के बच्चों में न केवल व्यवहारिक समस्याएं होती है बल्कि इसका उनके संज्ञानात्मक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिन परिवारों में अधिक तनाव, पारिवारिक संघर्ष, हिंसा व नशा किया जाता है उन परिवार के बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अधिक पायी जाती हैं।

भारत में प्राचीन काल से ही परिवार की महत्ता को स्वीकार किया गया है। भारत में परिवार समाज के संचालन की महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है। जिसका समाज के संचालन पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। परिवार का उसके सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी व्यापक असर होता है। भारत में परिवार मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के साथ-साथ मानसिक रोगियों की देखभाल करने का सबसे बड़ा संसाधन है। अधिकांश भारतीय परिवार अपने सदस्यों एवं रिश्तेदारों की स्वास्थ्य के देखभाल करने की जिम्मेदारी लेते हैं। भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में जहां आवश्यक प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी है, ऐसी स्थिति में परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। परिवार अपने सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के प्रयास करता है। अपने सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के उपायों का भी पालन करने के साथ ही यदि कोई पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार मानसिक स्वास्थ समस्या से ग्रसित होता है तो परिवार के सदस्य एवं रिश्तेदार आगे आकर उनके देखभाल एवं चिकित्सा की जिम्मेदारी स्वयं लेते हैं।

संयुक्त परिवार जिसमें दादा-दादी, माता-पिता, बुआ, चाचा-चाची भाई-बहन एवं अन्य लोग रहते हैं इससे मानसिक संबल मिलने से लोगों का मानसिक स्वास्थ्य एकांकी परिवार की अपेक्षा अधिक उन्नत होता है। अध्ययनों में यह पाया गया है कि जो वृद्ध अपने पोते -पोती के साथ खेलते हैं उन्हें 25% कम मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। दादा -दादी द्वारा बच्चों को कहानियों के माध्यम से न केवल अपने सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराया जाता है बल्कि उनमें सत्य, कर्मनिष्ठा, आत्मविश्वास, निडरता, ईमानदारी, पराक्रम, देश प्रेम एवं समाज के प्रति जिम्मेदारियों के भाव का विकास होता है।

परिवार में माता-पिता अपने बच्चों की देखभाल व उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ सुरक्षा का एहसास भी प्रदान करते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी है, परिवार अपने बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, उन्हें निराशा का सामना करने योग्य बनाते हैं। बच्चों में विभिन्न कौशलों का विकास करते हैं ताकि वे संकटों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें। माता-पिता एवं परिवार के सदस्य बच्चों को साइबर बुलिंग से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। यदि माता-पिता का व्यवहार बच्चों के प्रति समुचित नहीं होता है, वे उपेक्षापूर्ण व्यवहार करते हैं, बच्चों का तिरस्कार करते हैं, शारीरिक या मानसिक आघात पहुंचाते है तो इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे बच्चों में संज्ञानात्मक समस्याएं देखने को मिलती है।

भाई – बहन के बीच अच्छे संबंध उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है जबकि उनके बीच ईर्ष्या पूर्ण व्यवहार उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है यह प्रभाव माता पिता के न होने पर और गहरा होता है। शोधों में यह पाया गया है कि जिनकी बहन होती है वे अधिक विनम्र एवं दयालु होते हैं। भाई बड़ा हो तो उनकी अपेक्षा अधिक आत्मनिर्भर होता है जिनकी बहन बड़ी होती है। परिवार में भाई – बहन होने पर वे जीवन के बदलावों का सामना करने में अधिक सक्षम होते हैं। भाई-बहन के बीच आक्रामक व्यवहार होने पर उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। भाई – बहन एक दूसरे को अधिक तंग करते हैं तो इसका भी उनके मानसिक स्वास्थ्य खराब प्रभाव पड़ता है।

परिवार में मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के उपाय:-

सामूहिक रूप से भोजन करें।

सबके साथ मिलकर घर की साफ सफाई करें।

घर को सुव्यवस्थित रखने में सभी का सहयोग लें।

परिवार के सदस्यों के साथ सामूहिक खेल खेलें।

सामूहिक रूप से प्रार्थना करें।

आपस में बातचीत करें

मामूली वाद-विवाद व झगड़े को लंबा न खींचें।

माफी मांग लें एवं दूसरों को माफ कर दें।

एक दूसरे का देखभाल करें।

एक दूसरे को साहस प्रदान करें।

परिवार के साथ सामूहिक रूप से सामाजिक गतिविधियों में भाग लें।

परिवार के सदस्यों को कौशलों के विकास हेतु प्रोत्साहित करें।

तनाव को कम करने के उपाय लागू करे

परिवार में स्वस्थ मनोरंजन की व्यवस्था करें

परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय व्यतीत करें

आधुनिक समय में जैसे – जैसे लोगों में परिवार के प्रति उत्तरदायित्व एवं लगाल में कमी आ रही है वैसे – वैसे लोगों में समायोजन की समस्या के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है, आवश्यकता इस बात की है कि परिवार के सदस्य एक दूसरे के भावनाओं, इच्छाओं एवं आवश्यकताओं को समझने का प्रयास करें तथा एक दूसरे के प्रति सुसंगत व्यवहार करें।

डॉ मनोज कुमार तिवारी

परामर्शदाताए आर टी सेंटर, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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