आलेख

मैं अमेठी…….

डॉ रमाकांत क्षितिज

मैं अमेठी, मैं अवध का हिस्सा , मैं वीरो की माता रही हूं. मैं कवियों ,लेखकों की भी मां रही हु. मैं आदिकाल से हूं. मेरा नाम कई बार बदला. मैं राजा राम के राज्य का भी हिस्सा रही हूँ. मैंने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया है. मैं आधुनिक भारत मे भी महत्वपूर्ण रही हूं. मेरे बेटे राजा के बारे में कहा जाता था. न होता अमेठी में ऊसर तो अमेठी का राजा होता दाऊ ( देवता ) का दूसरा. मैं चौदह कोस में फैली हूँ. मेरी गोद मे सैकड़ो सन्तो ने जन्म लिया. मेरी गोद मे टीकर माफी,कालिकन भवानी,देवीपाटन,नंदमहर,दूधाधारी,मवई धाम,उल्टा गढ़ इत्यादि धार्मिक स्थल है.आज आधुनिक अमेठी में एच. ए. एल.,बी.इच. ई.एल.,एसीसी सीमेंट,सम्राट साईकल, मालविका स्टील प्लांट, इंडो गल्फ ऐसी अनेक कम्पनियों को भी, मैंने अपनी गोद मे जन्म दिया है. मेरे मुंशी गंज में अमेठी का के.ई.एम. संजय गांधी अस्पताल भी है.पानी की टँकी वगैरा तो बहुत छोटी बात है.छोटे मोटे कारखाने और कई प्लांट है .जब दुनिया चिट्ठी लिखती थी,तब से मैं टेलीफोन पर बात करती थी।मेरे यहाँ जो चुनाव जीतता है,वह तो मशहूर होता ही है.जो हारता है,वह भीअंतरराष्ट्रीय मशहूर हो जाता है.मैंने देश को प्रधानमंत्री भी दिया है. मैंने नेहरू गांधी परिवार की चार चार पीढ़ियों को संभाला है. मैं अपने राजा की भी हिमायती रही हूं. अपनी प्रजा को भी पाला पोसा है. मैने बैलगाड़ी से लेकर आधुनिक हवाई जहाजों तक को देखा है. मुझे छूकर पांच नेशनल हाइवे निकलते है. छोटी सड़को का तो जाल बिछा रखा है. नहरों से ऊसर खेतो से अच्छे खेत बनते देखा है. पाइराइट से मेरा भूगोल बदल गया है. ऊसर से सोलह आने की ज़मीन बनते देखा है. मैं देश मे आज से ही नही पौराणिक काल से व्ही. आई.पी.रही हूं. जो मेरे आस पास से गुजरा वह भी दुनिया मे मशहूर हो गया है. मैं स्वामी परमहंस जी और जायसी की कर्मस्थली रही हूं. राजा बेनी माधव मेरी गोद मे खेले है. मेरा नाम का उल्लेख बी.बी.सी.और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया की ज़ुबान पर छाया रहता है. राष्ट्रीय मीडिया तो मेरी गोद से बाहर निकलना ही नही चाहता. देश के कई क्षेत्र अधिक बीमार हो जाय फिर भी चर्चा नही होती. मुझे ज़ुकाम भी हो जाय तो इंटरनेशनल न्यूज़ हो जाती है. हा मैं अमेठी हूं… इतिहास बनाती हूं… भूगोल तक बदलने की क्षमता मुझमे है..मैं इतराती हूँ, चूंकि भगवान राम से लेकर अब तक कई देवी देवताओं समान ऋषियों मुनियों..महान पुरुषों की मां समान रही हूं.. हा मैं अमेठी..देश की कई राजधानियों से ज़्यादा मशहूर रही हूं….मैं आदिकाल से लेकर अब तक के भारत के इतिहास की जननी रही हूं….मैंने हमेशा पूरे हिंदुस्तान और हिंदुस्तानियों को अपनाया है….हा मैं अमेठी..हूँ….मैं राजनीति का मंदिर भी हूँ…मेरा दर्शन हर राजनैतिक व्यक्ति करना चाहता है.. मैं राजनीति का कुम्भ हूं.. हर कोई मुझमे डुबकी लगाना चाहता है.. हा मैं अमेठी..रमाकांत

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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