आलेख

शिक्षक

चन्द्रकला भागीरथी

शिक्षक यानी गुरु अर्थात जो रुह तक गुणों के ज्ञान का प्रकाश फैलाये शिक्षक ही बच्चों छात्रों के भविष्य का दाता होता है गुरु भी कई प्रकार के होते हैं प्रथम शिक्षक माता पिता होते हैं फिर प्राथमिक विद्यालय में बच्चा पढने जाता है वहीं से उसके उज्जवल भविष्य की नींव रखी जाती है अगर शिक्षक संपूर्ण ज्ञान लिए हुए है तो वो छात्रों में भी सही ज्ञान को बांटेगा उस बच्चे की नीव मजबूत होगी क्योंकि बच्चे तो कच्ची माटी के समान होते हैं उन्हें जिस रंग रूप गुण में ढालोगे उसी में ढलेगा अगर शिक्षक को ही सही ज्ञान नहीं होगा तो वो छात्रों को क्या सिखायेगा? यहां कबीर दास जी की पंक्ति है कि जाका गुरु आंधला। शिष्य निपट अनंध। अंधे अंधे ठेलिया। दोनों कूप अनंध।।
इसके बाद माध्यमिक शिक्षा की बात आती है इसमें अलग अलग विषय होते हैं सभी ज्ञान होना आवश्यक है कुछ छात्रों को व्यवहारिक रूप से भी ज्ञान दिया जाता है कि वे आगे क्या क्षेत्र चुनेंगे उसी हिसाब से विषय चुने और ये उम्र बहुत नाजुक होती है बच्चे किसी गलत संगत में न पड़े जैसे – नशा, जुआ – धुम्रपान – चोरी – आतंकवाद से बचे और प्यार या लवजेहाद आदि में पड कर बच्चे अपना जीवन और भविष्य खतरे में डाल लेते हैं यहां बच्चों को माता पिता और शिक्षकों को भी ध्यान देना चाहिए।
अब बात करते हैं उच्च शिक्षा की जहां पर छात्र एडरड हो जाते हैं हर चीज को समझने लगते हैं यहां किसी एक दो विषय को लेकर अपना भविष्य निर्धारित करते हैं उसी में आगे बढते है वो शिक्षा का क्षेत्र हो सकता है, डाक्टर या इंजीनियरिंग, पुलिस फौजी फिल्म, खिलाडी मतलब जिसमें उसकी रुचि होती है वो वहीं चुनता है और अपने जीवन में आगे बढता है।
अब आखिर गुरु होता है ईश्वर के मार्ग पर चलाने वाला भक्ति का ज्ञान देने वाला जिससे हम अपने जीवन में जो कर्म करते उनमें भी हम से जाने अनजाने पाप हो जाते हैं तो हमें मोक्ष की प्राप्ति कैसे होगी वहीं वो ज्ञान देते हैं। वैसे तो वो हर वस्तु प्रकृति हमारी गुरु है जिससे हम जीवन में कुछ न कुछ सिखते है जीवन भर इंसान सिखता ही है वह कभी पूंण नहीं होता बल्कि गलतियों का पुतला है जो गलती करता है।
लेकिन वही इंसान श्रेष्ठ है जो गलतियों से सिखता है और फिर दुसरो को सिखाता है जो ज्ञान देता है वही शिक्षक है शिक्षक से बढ़कर शिक्षा देने कोई नहीं शिक्षक ही भारत का भविष्य संवारते है।।

चन्द्रकला भागीरथी धामपुर जिला बिजनौर उतर प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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