आलेखसाहित्य

सतुआन


तारकेश्वर राय “तारक”


बिकाश क चक्र के साथ ताल मेल बिठावे खातिर धउरत बर्तमान समाज के लगे से न जाने का का टूट गइल गिर गइल भुला गइल कुछ अनजान में कुछ मजबूरी में । कुछेक खातिर अफ़सोस बा त कुछ के अहसास मात्र भी नइखे । भोजपुरिया बधार में तयोहारन क कवनो कमीं नइखे जरूरत बा त ओके मनावे खातिर खाली इच्छा आकांछा के । जब सुरुज देव से निकलल तपिश से प्राणी मात्र क मस्तिष्क गरमाये लागेला आ खेतिहर किसान के मेहनत क फल अनाज के राश के रूप में खरिहान में आँखि के सोझा लउके लागेला त भोजपुरिया बधार में एगो परव दस्तक देला जेके “सतुवान” के रूप में जानेला लोक समाज । इहे उ मौषम ह जब भगवान भास्कर आपन घर के बदल देलन, मीन राशि से मकर राशि में प्रवेश क जालन । महींनन से चलत खरवांस क पूर्णाहुति हो जाला आ शादी बियाह जइसन मांगलिक काम के श्री गणेश हो जाला । बर्तमान में तेजी से बदलत जिनिगी के साथ शहरीकरण भी सतुवान जइसन परवन के काल के गर्भ में भेजे में खूब सहभागिता निभावेला । शहर में त ई पर्व खत्मे बा ग्रामीण अंचल में भी एह पर्व के महत्ता पर गरहन साफ लउकता । हमनीके पुरखा पुरनिया क सोच आज के बैज्ञानिक लोग के सोच से कम ना रहे बढ़त गर्मी के प्रकोप के कम करे खातिर एह परब में सबेरे नहा के हो सके त गंगा नदी ताल भा इनारा कल पर, सतमेंझरा माने जौ, रहिला आदि के पीस के बनल सतुवा के नून पियाज हरियर मरीचा अचार आ टटका आम के टिकोरा के चटनी के साथ खाये के रीत ह भोजपुरिया बधार में । गुर सतुवा के साथ भी पसन परे त रउवा खा सकतानी । धनिया पोदीना भी एकर सुवाद के बढ़ा देला । सबसे बढ़ बात अगर कवनो बरतन नइखे त गमछा कपड़ा में भी ई भोजन आसानी से तैयार हो जाला । आम के पन्ना के साथ सतुवा पियल जाला एह मौका प । शरीर के ठंढाई त मिलबे करेला परिवारीक बंधन भी मजबूत होला । पूरा परिवार के सहभागिता लउकेला एह मौका प । खेती पर निर्भरता कम होखला के चलते ई परब के मनावे में कमी लउकता । कभी कभी शहर में हर समान उपलब्ध भी ना हो पावेला । धन्यवाद के पात्र बा शोशल मीडिया जेकर पहुंच गावं गिराव तक हो गइल बा जेकरा से हमनी जइसन आदमी के पता चल जाला की आज सतुवान ह । ना त ई कंक्रीट के जंगल में का बसंत आ का शरद । ई परब के मनावल जरूरी बा शहरी जीवन यापन करे वालन के बतावे खातिर की होली, दिवाली, दशहरा, छठ के अलावा भी बहुते परब तेवहार होला । बता भी उहे सकेला जेकर सोर गावँ से जुड़ल बा आपन रीती रिवाज संस्कार प फक्र बा देखले बा जियले बा ।

तारकेश्वर राय “तारक”
गुरुग्राम, हरियाणा

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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