आलेख

सैयद फकरूल हाजियां हसन    एक व्यक्तित्व   

अमन अहमद

     बहुत से लोग इस बात से अवगत नहीं हैं कि हैदराबाद के शाही राज्य में ब्रिटिश राज के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन का एक समृद्ध इतिहास थाक्योंकि निजाम अंग्रेजों का वफादार सहयोगी‘ था। उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि विदेशी नियंत्रण के खिलाफ प्रतिरोध की किसी भी आवाज को चुप करा दिया जाए। ऐसी ही एक कहानी है सैयद फकरूल हाजियां हसन की कहानीजिन्हें अम्माजान‘ के नाम से भी जाना जाता है। सैयद फकरूल हाजियान हसनभारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहीं। उन्होंने अपने बच्चों को भी ब्रिटिश शासकों के खिलाफ संघर्ष के उसी रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। वह एक ऐसे परिवार में पैदा हुई थी जो इराक से भारत आ गया था। उनके बच्चों को स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में पाला गया और उन्हें हैदराबाद हसन ब्रदर्स‘ के रूप में जाना जाता था।

     हाजिया की शादी अमीर हसन से हुई थी जो हैदराबाद में एक उच्च-स्तरीय लोक सेवक थे। नौकरी की वजह से उन्हें कई जगहों पर जाना पड़ा। हाजियां हसन ने अपने पति के साथ यात्रा की और इस प्रक्रिया में अंग्रेजीमराठीकन्नड़गुजरातीतेलुगु और उर्दू सीखने के लिए उन स्थानों की भाषाओं में गहरी रुचि व्यक्त की। अपनी पूरी यात्राओं के दौरानउन्होंने भारतीय महिलाओं की पीड़ालैंगिक असमानतामहिलाओं में शिक्षा और लैंगिक अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी देखी। उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं के विकास और कल्याण के लिए काम करने का फैसला किया।

     महात्मा गांधीजवाहरलाल नेहरूसुभाषचंद्र बोसअबुल कलाम आजाद और अन्य प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों ने उन्हें अम्माजान‘ नाम दिया। भले ही वह ब्रिटिश शासित क्षेत्र में रहती थींलेकिन वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक सक्रिय भागीदार के रूप में थीं। विदेशी उत्पादों के बहिष्कार के आह्वान के दौरानहाजिया ने आयातित कपड़े जलाए, ‘खिलाफत‘ और असहयोग‘ में शामिल हुए और स्वतंत्रता सेनानियों को आवासधन और अन्य सुविधाएं प्रदान करके बिना शर्त समर्थन प्रदान किया। बाद मेंउन्होंने और सरोजिनी नायडू ने आज़ाद हिंद फौज के कैदियों की रिहाई के लिए अथक प्रयास किया।

     उनके तीन बच्चों बदरूल हसनजफर हसन और आबिद हसन को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बदरूल हसन (बड़ा बेटा) महात्मा गांधी की विचारधारा का पालन करते थे । जफर हसन भी देशभक्त थेहैदराबाद सरकार में शिक्षाविद बने। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भक्त , आबिद हसन (सबसे छोटे बेटे) को “जय हिंद” का नारा गढ़ने के लिए जाना जाता हैजो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के साहित्यिक इतिहास में एक यादगार गान बन गया है।

     1970 में सैयद फकरूल हाजिया हसन का निधन हो गया। वह अपनी मातृभूमि और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक दृढ़ योद्धा के रूप में जानी जाएंगी।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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