आलेखसाहित्य

हनुमान जन्मोत्सव  कथा

नीतू नन्द किशोर मौर्या

प्रभु राम, के परम भक्त पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म, हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
आइए आप सभी को बताती हूं ; संकटों का नाश करने वाले अंजनी पुत्र श्री हनुमान जी की जन्म कथा ।

वैसे तो अनेकों कथाएं श्री हनुमान जन्मोत्सव की प्रचलित है।उनमें से मैं एक कथा आप सभी लोगों को सुनाती हूं।

त्रेता युग की बात है अयोध्या नरेश राजा दशरथ संतानहीन होने के  कारण अत्यंत दुखी रहते थे।तब वशिष्ठ ऋषि ने उन्हें पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराने का सुझाव दिया।

यज्ञ अयोजन किया गया, यज्ञ की आहुति के समय यज्ञ की अग्नि से अग्नि देव  प्रकट हुए। और उन्होंने एक खीर भरे पात्र को महराज दशरथ को सौंपते हुए कहा! ये खीर अपनी तीनों रानियों को खिला दीजिए, इससे आपको उत्तम संतान की प्राप्ति होगी।
राजा दशरथ ने खीर को अपनी तीनों रानियों में बराबर हिस्सों में बांट दिया।

रानियों ने खीर खाना प्रारंभ किया। लेकिन जैसे ही कैकई ने खीर खानी चाही ,तभी न जाने कहां से एक चील उड़ती हुई आई और झपट्टा मारकर कर उस पात्र से थोड़ी खीर निकाल ले गई।

इसके उपरांत वो चील उड़ती हुई दूसरी तरफ निकल गई।
इधर दूसरी तरफ काफी दूरी पर एक खुले हुए स्थान पर वानर राज महराज केसरी और माता अंजनी भगवान शिव की पूजा करते हुए अपने निसंतान होने का दु:ख सुना रहे थे। वो बार बार प्रभु से संतान होने के लिए प्रार्थना कर रहे थे।

वानर राज ने भोले नाथ से प्रार्थना की _”हे प्रभु आपकी दया से मैं वानर राज बना , परंतु मेरा अब तक कोई उत्तराधिकारी नही है। हे प्रभु,फिर तो इस धरती से मेरा नाम सदा के लिए मिट जायेगा। हे प्रभु, दया करो , मुझे पवन के समान तेज,पराक्रमी और रूद्र के समान एक बालक प्रदान कीजिए।

भोलेनाथ से अपने भक्त का दु:ख देखा न गया और उन्होंने अपनी माया रची। तभी वो चील उड़ती हुई उनके सर के ऊपर से गुजरी,इस बीच खीर की कुछ बूंदे नीचे टपक कर माता अंजनी की हथेली पर आ गिरी।
माता अंजनी यह देखकर चकित हो गई ।माता अंजनी ने कपि राज केसरी से खीर गिरने की बात बताई तो महराज केसरी ने कहा कि! हो सकता है यह भोलेनाथ की महिमा हो , तुम इसे प्रभु का प्रसाद मान कर ग्रहण कर लो।
माता अंजनी ने भोलेनाथ को प्रणाम करके प्रसाद को ग्रहण कर लिया।

इसके बाद उनके गर्भ से चैत्र पूर्णिमा के दिन एक सुंदर दिव्य बालक का जन्म हुआ।जिसका नाम हनुमान रखा गया। इन्हें शिव जी का अंश भी कहा जाता है।
प्रति वर्ष इस दिन हनुमान जन्मोत्सव काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

बचपन में बजरंगबली जी ,पवन पुत्र और मारुति नंदन के नाम से जाने जाते थे,परंतु जब देवराज इंद्र के व्रज का प्रहार उनकी ठुड्डी अर्थात हनु पर हुआ तब से इनका नाम हनुमान पड़ गया।

नीतू नन्द किशोर मौर्या

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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