आलेख

हाँ मैं श्रमिक हूँ

सुषमा दीक्षित शुक्ला

मैं श्रमिक हूँ हाँ मैं श्रमिक हूँ ।
समय का वह प्रबल मंजर ,

भेद कर लौटा पथिक हूँ ।
मैं श्रमिक हूँ हाँ मैं श्रमिक हूँ।

अग्निपथ पर नित्य चलना ,
ही श्रमिक का धर्म है ।

कंटको के घाव सहना ,
ही श्रमिक का मर्म है ।

वक्त ने करवट बदल दी,
आज अपने दर चला हूँ।

भुखमरी के दंश से लड़,
आज वापस घर चला हूँ ।

मैं कर्म से डरता नही ,
खोद धरती जल निकालूँ।

शहर के तज कारखाने ,
गांव जा फिर हल निकालूँ ।

कर्म ही मम धर्म है ,
कर्म पथ का मैं पथिक हूँ।

समय का वह प्रबल मंजर,
भेद कर लौटा पथिक हूँ।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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