कहानी

  • औकात अपनी अपनी

    __वीणा गुप्त रोज की तरह आज फिर सुबह से ही सबद- कीर्तन  प्रारंभ  हो गया था। हलवाई अपने  टैम्पू से…

    Read More »
  • मोह बंध

    __वीणा गुप्त सुबह पाँच बजे  अलार्म  बज गया।  उनींदी शशि ने जल्दी से उसे बंद किया। अलार्म एकाध बार और बज…

    Read More »
  • मां की अहमियत

    यह कहानी ऐसी लड़की की है जिसे अपनी मां को अपने दोस्तों से मिलवाने में शर्म आती है क्योंकि उसकी…

    Read More »
  • मोह बंध

    __वीणा गुप्त सुबह पाँच बजे  अलार्म  बज गया।  उनींदी शशि ने जल्दी से उसे बंद किया। अलार्म एकाध बार और बज…

    Read More »
  • अतिक्रमण

    चन्द्रकान्त खुंटे “क्रांति” साल्हे नामक गाँव मे मेरा एक मित्र रहता है जिसका नाम गुरुदयाल है उनके गाँव बिलासपुर से शिवरीनारायण…

    Read More »
  • करवट लेती जिंदगी

    __वीणा गुप्त रमा आज बहुत खुश थी। आज उसके  बहू बेटे  शादी के बाद पहली बार घर आ रहे  थे। पहली…

    Read More »
  • जीवन क्या है

    कमला सिंह ईश्वर का सबसे खूबसूरत तोहफा मनुष्य है मनुष्य का तन है और उसका जीवन हैजीवन के तपोवन जिसमें…

    Read More »
  • जीवन क्या है

    साधना तोमर “दीदी! ऐसे कब तक चलेगा ?अपने आप को संभालिए।”कैसे संभालूँ,कैसे भूल जाऊंँ वे बयालीस साल जो मैंने उनके…

    Read More »
  • खेल नियति का

    __वीणा गुप्त रमन ने ज्यों ही स्कूटर स्टार्ट  किया और आफिस की ओर निकला कि देखा  सामने  भाटिया खडा़ था।…

    Read More »
  • निश्छलता

    __सुधीर श्रीवास्तव       ट्रिंग…. ट्रिंग….. ट्रिंग …!जवाब नदारद था।       जब तीसरी बार भी फोन नं उठा तो रवि ने झुंझलाहट…

    Read More »
Back to top button
error: Content is protected !!