गजल

  • ग़ज़ल

    __डा.रमेश कटारिया पारस ग्वालियर औरों के घर में झांकते है उनसे बच के रहनाऊँची ऊँची हांकते है उनसे बच के…

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  • आर्या की शायरी

    आज हवाओ की रफ्तार देख ,,समझ आया ,शायद किसी ने फरमान भेजा हैरूबरू न सही , बड़ी दूर से ही…

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  • ग़ज़ल

    __शेख रहमत अली बस्तवीबस्ती (उ, प्र,) वह दिखते हैं सीधे-सरल व्यौहार से।है तेज़ चलती जिनकी ज़ुबा तलवार से।। गाज़ इक…

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  • मज़हबी राजनीति

    __शेख रहमत अली बस्तवीबस्ती (उ, प्र,) मज़हबी राजनीति जबतक चलता रहेगा।बिगड़ा हालात देश का बिगड़ता रहेगा।। सिलसिलेवार गऱीबों पे सितम…

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  • ग़ज़ल

    __शेख रहमत अली बस्तवीबस्ती (उ, प्र,) प्यार को दिल से अपने निकालते क्यों हो।दर्द सहन न हो तो ज़ख़्म पालते…

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  • हिंदवाणी हूँ साहब

    बह्य: २१२२ ११२२ ११२२ २२ __ललिता शर्मा’नयास्था’भीलवाड़ा(राज.) लोग बोले ना बोले, चल जाती हूँ मैं।हिंदवाणी हूँ साहब, ढल जाती हूँ…

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  • ग़ज़ल

    __शबनम मलिकमंगलौर हरिद्वार, उत्तराखंड क्या लिखू मैं आप पर, हर लफ़्ज़ मेरे आपको सलाम करते हैं।हर पल, हर दिन आपको…

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  • ग़ज़ल

    __अवनीश त्रिवेदी ‘अभय’© अब भी वो मुझसे ये अक़्सर बोलते हैं।राह में उनसे भी पत्थऱ बोलते हैं। ये नहीं मैं…

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  • आये का तुकांत

    ग़ज़लरदीफ़ – हो तुम __प्रीति चौधरी”मनोरमा”जनपद बुलंदशहरउत्तरप्रदेश जीवन में प्रेम लेकर आये हो तुमउर पटल पर मेघ बन छाये हो…

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  • ग़ज़ल

    222 212 122 __कनक सब कुछ है आज इस जहां मेंइंसा ये नफरत कहां से लाया।। राह नहीं ये दिलो…

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