ग्राम टुडे ख़ास

अंजु दास गीतांजलि की 5 ग़ज़लें

ग़ज़ल
सारे रिश्ते नाते भुला देना।
इस तरह तुम मुझे सज़ा देना।

कोई पूछे मेरे विषय में तो
तुम मुझे अजनबी बता देना।

ग़र ग़लत मैं रही कहीं पर भी
तुम मेरी ग़लतियाँ बता देना।

बस यही इल्तिज़ा मैं करती हूँ
ज़ख़्म कोई न अब नया देना।

बाद अंजू के मरने पर साजन
कांधा अर्थी को तुम लगा देना।

गज़ल

हसीं दिन होंगे या हसीं रात होगी
अकेले में जब भी मुलाकात होगी

मिलेंगे करेंगे मुहब्बत की बातें
न इसके सिवा कोई औ बात होगी

न करना सजन तुम ज़रा सा भी पर्दा
सुनो चूमने से शुरूआत होगी

बदन पर तुम्हारे लिखुंगी गज़ल मैं
गज़ब का शमां और हालात होगी

जगा कर रखुंगी पिया रात भर मैं
मिलन होगी अंजू तो बरसात होगी

गज़ल

परिंदा सर उठाना चाहता है
वो मुझको कुछ बनाना चाहता है

परिंदा है उड़ा आकाश में जो
मुझे क्या वो बताना चाहता है

ख़ुदा का शुक्र है‌ शायद वो मुझको
बहुत कुछ तो सिखाना चाहता ‌ है

चलो राहों पे अपने ,वो मेरा सर
फकर ‌ से तो उठाना चाहता है

दिले नादां को मंज़िल के तरफ़ ही
परिंदा भी बुलाना चाहता है

खुदी से हार बैठी है ए अंजू
परिंदा ‌ ये जताना चाहता है ‌

कौमी एकता ग़ज़ल


न ही हिन्दू कभी बनना , न मूसलमान बनना तुम।
करे सब दोस्ती तुमसे , सही इंसान बनना तुम।

इबादत सबकी करना तुम ,सदाक़त में सदा रहना
ज़माना सीख ले तुमसे , नई पहचान बनना तुम।

कभी घण्टी बजा लेना , कभी चादर चढ़ा लेना
कभी दीवाली तुम बनना , कभी रमज़ान बनना तुम।

वतन के वास्ते जीना , वतन के वास्ते मरना
हिफाज़त सबकी हो जिसमें,वो हिंदुस्तान बनना तुम।

बहा देना लहू अपना , बचा लेना चमन अंजू
करेगी फक्र ये दुनियां , वतन की शान बनना तुम।

ग़ज़ल

गरीबों की बस्ती जलाता कौन है।
ज़रा सोचिये तो सताता कौन है।

नई योजनाओं का देकर के झाँसा
यूँ बैंकों के चक्कर लगाता कौन है।

न पानी , न बिजली , न कोई है साधन
किसानों को बोलो रुलाता कौन है।

लेकर वोट बनते हैं मालिक देश का
इशारों पे सबको नचाता कौन है।

झूठा वादा अच्छे दिनों का कर के फिर
बुरे दिन सभी को दिखाता कौन है।

अंजु दास गीतांजलि…

…✍️ पूर्णियाँ , बिहार

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One Comment

  1. हार्दिक धन्यवाद आपका दि ग्राम टुडे अखबार

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