ग्राम टुडे ख़ास

अंजु दास गीतांजलि के दोहे

रिमझिम रिमझिम बारिशें,सुन लाते हैं पेड़।
ताल – तलैया तब भरे, टुटे खेत के मेड़।

साँय – साँय चलती हवा, खूब मचाए शोर।
घने पेड़ की छाँव में , कुके पपीहा मोर।

मानव दानव बन गया, बदल गया व्यवहार।
पर्यावरण कि कोख पे ,करे वार पे वार।

हरे पेड़ मत काटिये , धरा लगे वीरान।
पेड़ धरा श्रृंगार है , कहे गीता कुरान।

अंजु लगाती पौध है, कर के ये विस्वास।
बड़ा होकर पेड़ बने, मिले सभी को स्वास।


अंजु दास गीतांजलि…✍️पूर्णियाँ (बिहार) की क़लम से!!

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One Comment

  1. हार्दिक धन्यवाद आपका दि ग्राम टुडे

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