ग्राम टुडे ख़ास

अधिकार

माधुरीमोहिनी

         ⚛️🌀अधिकार 🕉️🔥

माँग भरी तुमने सजना जब ,
पूर्ण दिया मुझको अधिकार ।
एक हुऐ तन पाकर दो अब ,
सौप दिया मन की गति धार ।।
हो पतवार बने इस जीवन ,
है तुमसे इस जीवन सार ।
जीत गये समरांगण में अब ,
आज सजी गल में गलहार ।।

संतति मांग रहा अब पूरन ,
दो हमको अब ही अधिकार ।
लायक छोड़ कहे हम तुमको
या निकले सुन लो तलवार ।।
बेबस मातु पिता नित सोचत
केवल अश्रु बहे उर धार ।
जीवन नर्क बने लख साजन ,
क्या परिणाम मिले अँधियार ।।

काजल पायल घूँघट से भर
आज चली पिय के हिय द्वार ।
नैन शरारत से भरते लख
है अधरों पर ले उपहार ।।
सेज बिछे मनभावन साजन
आज मिला सुख का अधिकार ।
प्रेम बहे उछले मचले अब
जीवन नौ रस से गुलजार ।।

        ----- माधुरी डड़सेना "मुदिता"

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