ग्राम टुडे ख़ास

अनुरागिनी

डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय

नारी तुम अनुरागिनी – – – २

तेरे नयन भरे अनुराग ।
पलकों में है ढेंरों राज ।
मन से हो,तुम मानिनी,
नारी तुम हो,रागिनी ।।

नारी तुम – – – – – – – – २

हिय में भरें है राज ।
मन में है ,बड़ी लाज ।
कहने को नैना आतुर
पर, तुम शालिनी हो ।।

नारी तुम – – – – – – – – २

सपने तेरे हैं नवल – नबेली ।
प्रेम- पाश में हो अलबेली ।
प्रीति , तुम्हारी सागर जैसी,
बंधन में हो तुम मुक्ति ।।

नारी तुम – – – – – – – – – २

पल – पल की तुम मानिनी ।
मन – मन हो, अभिमानिनी ।
रोम – रोम अनुराग भरें हैं ,
हो,तुम जीवन, दर्शिनी ।।

नारी तुम – – – – – – – – २

@ डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय
मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत ।🌺

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