ग्राम टुडे ख़ास

अपने पराये

के.एम.त्रिपाठी “कृष्णा”

कहाँ किसने वादे निभाये हैँ कब
नहीं कोई अपना पराए हैं सब ।

अपने लिए कह दिए हम तुम्हारे
पड़ा काम जब भी हुये ना हमारे
जिनके लिए हम लड़ते रहे
लड़ते रहे हम झगड़ते रहे
वही आज आंखें चुराए हैं सब ।
कहां किसने वादे निभाए है कब
नहीं कोई अपना पराए हैं सब ।

नकाबों में चेहरे छुपाए हुए
सच्चाई दिल में दबाए हुए
चले साथ मेरे कदम दर कदम
कहते रहे हम हैं तो क्या गम
कई राज दिल में छुपाए हैं सब ।
कहां किसने वादे निभाये हैं कब
नहीं कोई अपना पराये हैँ सब ।

अपंगों के जैसे दबंगों के संग
सभी रंग गए आज हैं एक रंग
समझते हैं हम उनकी मजबूरियां
बढ़ा ली है यूं मुझसे क्यूँ दूरियां
अकेले में दुखड़े सुनाएं हैं सब ।
कहाँ किसने वादे निभाए हैं कब
नहीं कोई अपना पराए हैं सब ।

के.एम.त्रिपाठी “कृष्णा”
(प्राचार्य) प्रतापगढ़

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