ग्राम टुडे ख़ास

आज के बदलते परिवेश में दशहरा का महत्व

डॉ मंजु सैनी

इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था।इसलिए आज के दिन को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में जाना जाता हैं।इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।प्राचीन समय से इस दिन सनातन धर्म में शस्त्र पूजन की परंपरा चली आ रही है।किसान अपने अस्त्र शस्त्र की पूजा भी करते हैं।इस दिन लोग शस्त्र पूजन के साथ ही वाहन पूजन भी करतें हैं।वाहन पूजन आज के दिन बहुत ही शुभ माना जाता हैं।घर के पुरुष वर्ग द्वारा ही दशहरा पूजन की परंपरा हैं।अनेक परम्पराओं में पान खाने की एक पुरानी परंपरा आज धूमिल सी होती दिखाई दे रही हैं।रावण दहन के बाद पान खाने की पुरानी परंपरा है।दशहरा यानी क‍ि व‍िजयादशमी पर पान खाने की परंपरा तो हम सभी न‍िभाते हैं। पान को मान और सम्मान का भी प्रतीक माना गया है। लेक‍िन क्‍या आपको पता है क‍ि अरसे से चली आ रही इस परंपरा का अर्थ क्‍या है? आख‍िर क्‍यों रावण दहन के बाद पान खाया जाता है?तो आइए जानते हैं क्या महत्व है आज के दिन पान खाने का।
पान का प्रयोग पूजा-पाठ, कथा और अन्‍य सभी शुभ कार्यों में किया जाता है। हर पूजा हवन में पान की पूजा शुभ मति जाती है।यही वजह है क‍ि नवरात्रि पूजन के दौरान भी मां को पान-सुपारी चढ़ाया जाता है। शारदीय नवरात्रि के समय मौसम बदल रहा होता है। इस समय संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में पान खाने की यह परंपरा रोगों से लड़ने की भी क्षमता व‍िकस‍ित करती है।पुरानी परम्पराए बहुत गहन अध्ययन की पध्दति पर आधारित होती हैं।व्रत की परंपरा में पान का अपना महत्व होता हैं।व्रत‍ियों के ल‍िए अत्‍यंत लाभकारी है पान
नवरात्रि पर नौ दिनों तक लोग व्रत रखते हैं। जिसके कारण उनकी पाचन की क्रिया प्रभावित होती है। पान का पत्ता पाचन की क्रिया को सामान्य बनाए रखता है। इसलिए दशहरे पर पान खाया जाता है मान्यतासीए भी हैं कि पवनसुत को भी अत्‍यंत प्र‍िय है पान हनुमानजी को भी पान अत्‍यंत प्र‍िय है। पान को व‍िजय का भी प्रतीक माना गया है। पान का बीड़ा शब्द का एक अर्थ यह भी है कि इस दिन हम सही रास्ते पर चलने का बीड़ा उठाते हैं। दशहरे पर रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाने का महत्व है। ऐसा माना जाता है कि दशहरे पर पान खाकर लोग असत्य पर सत्य की जीत की खुशी मनाते हैं।आज भी कुछ स्थानों ओर यह परम्परा जीवित हैं।

डॉ मंजु सैनी
गाज़ियाबाद

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