ग्राम टुडे ख़ास

आत्मा से परमात्मा तक

उषा शर्मा त्रिपाठी
ध्यान- आत्मा से परमात्मा तक का एक खूबसूरत सफ़र*
ध्यान के समय मन और इंद्रियों को अंतर्मुखी बनाये! प्रतिदिन यह चिंतन अवश्य करें कि, ये सब व्यक्त अव्यक्त सत्व मेरा स्वरूप नहीं है, मैं केवल मन और मन का विषय नहीं हुं! मैं अविद्या अस्मिता राग द्वेष आदि क्लेशों से मुक्त मुक्त हुं*

मैं आनंदमय ज्योतिर्मय शुध्दसत्व अमृत पुत्र हुं, मैं उसी ब्रह्म का अंश हुं, मैं आनंद सिंधु रूपी परमेश्वर में बूंद से समुद्र होना चाहती/ चाहता हुं! वही ईश्वर मुझ पर शांति और परम सुख की सब ओर से वर्षा करते हैं! एक पल भी परमपिता मुझे अपने से दूर नहीं कर सकते*

“मैं प्रभु में हुं और प्रभु सदा मुझ में है”
इस भाव से अपने आपको द्रष्टा साक्षी मानकर ईश्वर के समक्ष अपने आप का पुर्ण समर्पण करें*
यदि फिर भी उस आनंद रुपी समुद्र में बूंद बन कर आनंद को अनुभव ना करें तो दोष हमारा ही है*
सोऽअहम्* सोऽअहम्* सोऽअहम्**

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