ग्राम टुडे ख़ास

आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे मनोहर लोहिया जी

पुण्यतिथि विशेष

डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”

राम मनोहर लोहिया जी एक स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजवादी और सम्मानित राजनीतिज्ञ थे. राम मनोहर जी ने हमेशा सत्य का अनुकरण किया और आजादी की लड़ाई में अद्भुत काम किया. भारत की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और उसके बाद ऐसे कई नेता आये जिन्होंने अपने दम पर राजनीति का रुख़ बदल दिया उन्ही नेताओं में एक थे राममनोहर लोहिया जी। वे अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के लिए जाने गए और इन्ही गुणो के कारण अपने समर्थकों के साथ-साथ उन्होंने अपने विरोधियों से भी बहुत सम्‍मान हासिल किया।

राम मनोहर लोहिया जी की विचारधारा :-

लोहिया जी ने हमेशा भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अंग्रेजी से अधिक हिंदी को प्राथमिकता दी. उनका विश्वाश था कि अंग्रेजी शिक्षित और अशिक्षित जनता के बीच दूरी पैदा करती है. वे कहते थे कि हिन्दी के उपयोग से एकता की भावना और नए राष्ट्र के निर्माण से सम्बन्धित विचारों को बढ़ावा मिलेगा. वे जात-पात के घोर विरोधी थे. उन्होंने जाति व्यवस्था के विरोध में सुझाव दिया कि “रोटी और बेटी” के माध्यम से इसे समाप्त किया जा सकता है. वे कहते थे कि सभी जाति के लोग एक साथ मिल-जुलकर खाना खाएं और उच्च वर्ग के लोग निम्न जाति की लड़कियों से अपने बच्चों की शादी करें. वे ये भी चाहते थे कि बेहतर सरकारी स्कूलों की स्थापना हो, जो सभी को शिक्षा के समान अवसर प्रदान कर सकें.

उनकी यह भी विचारधारा है कि हमें अपना काम करते रहना चाहिए, वहां भी जहां इसकी कद्र ना हो’, भारतीय जीवन आज भी जाति के बधी सीमओं के अंदर ही चलती है।भारत में जाति एक ऐसा अभेद किला बन गया है जिसे तोड़ नही सकते हैं। उनका मनाना था कि जाति अवसरों को बाधित करती है और अवसर न मिले तो हमारी योग्यता भी कुंठित हो जाती है और यही कुंठित अवस्था हमारे आने वाले अवसरों को भी बाधित कर देती है।जितने अंग्रेजी अखबार भारत में छपते है उतना तो अंग्रेजो के देश में भी नही छपते है अंग्रेजी का दबदबा जितना भारत में है उतना कही नहीं है जिस कारण से भारत आज आजाद होते हुए अंग्रेजी का गुलाम है।जो ज्यादा बोलते है वे क्रांति नही कर सकते है और ना ही ज्यादा कार्य कर सकते है क्रांतिकारी बनने के लिए तेजस्विता की जरूरत होती है।
स्त्रियों के विषय में उनका मनाना था कि आज के समय में भारतीय नारी की आदर्श सीता नहीं बल्कि द्रौपदी होनी चाहिए।नौजवान किसी भी बदलाव के लिए पाँच साल का इंतजार नहीं करती। समाजवाद के जरिये दरिद्रता का बंटवारा नही बल्कि समृद्धि का आपसी वितरण है। अंग्रेजो ने सिर्फ बंदूक की गोली और अंग्रेजी बोली के बल पर हम पर राज किया।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में लोहिया जी का योगदान:-

स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने की उनकी बचपन से ही प्रबल इच्छा थी जो बड़े होने पर भी खत्म नहीं हुई। उन्होंने गांधी जी को सदैव अपना गुरु माना । गांधीवादी विचार धारा में ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वर्ष 1942 में महात्मा गांधी, नेहरू, मौलाना आजाद और वल्लभभाई पटेल जैसे कई शीर्ष नेताओं के साथ उन्हें भी कैद कर लिया गया था.

स्वतंत्रता के बाद की गतिविधियाँ

आजादी के बाद भी वे राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में ही अपना योगदान देते रहे. उन्होंने आम जनता और निजी भागीदारों से अपील की कि वे कुओं, नहरों और सड़कों का निर्माण कर राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए योगदान में भाग लें.

लोहिया ने उन मुद्दों को उठाया जो लंबे समय से राष्ट्र की सफलता में बाधा उत्पन्न कर रहे थे. उन्होंने अपने भाषण और लेखन के माध्यम से जागरूकता पैदा करने, अमीर-गरीब की खाई, जातिगत असमानताओं और स्त्री-पुरुष असमानताओं को दूर करने का प्रयास किया. उन्होंने कृषि से सम्बंधित समस्याओं के आपसी निपटारे के लिए ‘हिन्द किसान पंचायत’ का गठन किया। वे सरकार की केंद्रीकृत योजनों को जनता के हाथों में देकर अधिक शक्ति प्रदान करने के पक्षधर थे. अपने अंतिम कुछ वर्षों के दौरान उन्होंने देश की युवा पीढ़ी के साथ राजनीति, भारतीय साहित्य और कला जैसे विषयों पर कार्य किया.।
राम मनोहर लोहिया का निधन 57 साल की उम्र में 12 अक्टूबर, 1967 को नई दिल्ली में हो गया.।
ऐसे स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजवादी और सम्मानित राजनीतिज्ञ राम मनोहर जी उनकी पुंण्यतिथि पर मेरा शत-शत नमन

डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”
लेखिका, कवियत्री, शिक्षिका, समाजसेविका
ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

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