ग्राम टुडे ख़ास

“इक कहानी दर्द की”

किरण मिश्रा “स्वयंसिद्धा”

कह रहें हैं इक कहानी दर्द की ।
इश्क़ है खालिश निशानी दर्द की।।

खिल रहें है अश्क़ चेहरा धुल रहा,
उठ रहीं टीसें पुरानी दर्द की ।

जा रहा है यार जानिब छोड़ के
दर्द लिखता तर्जुमानी दर्द की।

दिल बनाया चाक खंजर रख दिया
कैसी यार-ए शादमानी दर्द की ।

पढ़ रहा है जो जमाना अब शिफा़,
नज्म रचती ज़ाफ़रानी दर्द की।।

किरण मिश्रा #स्वयंसिद्धा
नोयडा

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