ग्राम टुडे ख़ास

ऊ घर स्वर्ग रहे

विंध्यवासिनी तिवारी (बिन्नी)


ऊ घर रहे, तब स्वर्ग रहे
ऊहवा प्रेम रहे विश्वास रहे
एक-दूजे के मनवा शांत रहें
तब भरल पूरल परिवार रहें
चाचा चाची के साथ रहे
ईआ बाबा के आशिर्वाद रहे
बड़की माई के डॉट रहें
बड़का बाबू जी के फटकार रहें
भउजी के पूरा स्नेह रहें
भैया से हरदम डर रहे
ऊ गाँव के सुन्दर छांव रहे
हरियाली के भी साथ रहे
ऊहवा खेतीबारी खूब रहे
मकई बाजरा भरपूर रहे
गइआ भइसिया घरही रहे
भइसी के मट्ठा मिलत रहे
त खान-पान मजबूत रहे
लइकन के बडहन झुंड रहे
त खेल कबड्डी होत रहे
इ देहियो भी मजबूत रहे
ऊ शहर नाही गाँव रहे
परिवार के पूरा साथ रहे
ऊ घर रहे तब स्वर्ग रहे
ऊहा प्रेम रहें विश्वास रहे

विंध्यवासिनी तिवारी (बिन्नी)
( स्वरचित)

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