ग्राम टुडे ख़ास

एक बार प्यार का एहसास सबको होता है

डॉ. सरिता यादव

प्यार ,इजहार ,मोहब्बत ,मिलना बिछड़ना ,यह सब नियति का खेल है! लेकिन जब हमें इन सब का पता चलता है तो वक्त बहुत आगे निकल जाता है तब हमारे पास केवल पश्चाताप के सिवा कुछ नहीं रहता मेरी यह कहानी भी प्यार करने वालों की ही है पर वह यह समझ नहीं पाती कि वह यह प्यार दोनों तरफ से है या अकेले वही उसको चाहती थी तनवी जब तनवी को उस प्यार का एहसास हुआ तब पता चला कि ऐसा कोई संसार में व्यक्ति नहीं जिसको जीवन में एक बार प्यार नहीं हुआ हो ।चाहे कुछ समय के लिए यह एहसास दिल में आया हो पर प्यार सब को होता है एक बार हुआ हो चाहे कुछ समय के लिए यह एहसास दिल में आया हो पर प्यार सब को होता है। एक बार चाहे वह किसी भी उम्र में हो जैसे तन्वी को हुआ पर समझ नहीं पाई जब समझ में आया तब समय ने उसका साथ नहीं दिया। जिस तरह कोई पेड़ ऐसा नहीं जिसको हवा न लगे और जिसको हवा बिना छुए निकल जाए और एक भी पत्ता नहीं हिले वैसे ही प्यार भी वह एहसास है कि बिना हुए नहीं रह सकता कभी न कभी किसी ने किसी को किसी न किसी से किसी से किसी ना किसी मोड़ पर हो जाता है तन्वी ने अभी 12वीं की परीक्षा पास की थी नई-नई कॉलेज जाने लगी थी दिल में बहुत उम्मीद थी नए दोस्त बनेंगे नए कपड़े वह अपनी लाइफ से बहुत खुश थी आखिर वह समय आ ही गया जिसका उसको इंतजार था अब रोज घर से दोस्तों के साथ कॉलेज जाना कॉलेज में मौज मस्ती करना पढ़ना जैसे उस सोचा वैसा ही उसको कॉलेज में देखने को मिला गया वह बहुत खुश अनुभव कर रही थी देखते देखते समय निकलता गया और तन्वी अगली कक्षा में हो गई एक दिन तन्वी का कोई दोस्त कॉलेज नहीं गया तन्वी को अकेले जाना पड़ा। उसने बस में जाना ज्यादा सेफ समझा और वह जैसे ही बस में बैठी बस में बैठते ही उसकी नजर सुंदर से लड़के पर अटक गई तन्वी ने उसको देखा एक नजर और उसको देखती ही गई दोनों एक दूसरे को देखते रहे और तन्वी ने दोबारा से उसको देखा तब तक तन्वी का कॉलेज आ गया और वह उतर के चल दी अब तन्वी के मन में हजारों ख्याल आने लगे दूसरे दिन तन्वी फिर बस में कॉलेज जाने को तैयार हो गई उसको उस लड़के को देखना था जिसको देखते ही तन्वी के मन में हलचल मच गई थी ।अब दिन निकलते गए तन्वी ने तो उस लड़के का न तो नाम पूछ पाई और ना ही उसे यह पता कर पाई कि वह कहां से आता है ।फिर तन्वी ने सोचाआज तो वह उसको पूछ कर ही रहेगी कि आप का क्या नाम है कहां से आते हो । क्योंकि वह भी तन्वी को देखता था और उसने भी कभी हिम्मत नहीं की कि उससे पूछने कि आखिर तन्वी ने 1 दिन हिम्मत दिखाने की कोशिश की लेकिन जब तन्वी ने यह सोचा कि आज तो वह पूछ कर ही रहेगी और वह रोजाना की तरह कॉलेज जाने के लिए तैयार हुई और बस में बैठकर देखा वह लड़का नहीं आया बस में तन्वी ने सोचा कल आएगा वह दूसरे दिन फिर गई नहीं आया लड़का अब तन्वी परेशान हो गई। दोस्तों ने पूछा कि हम देख रहे हैं तन्वी कि तुम काफी दिनों से बहुत परेशान हो तन्वी ने कहा कुछ नहीं फिर ज्यादा पूछने पर अपने दोस्तों से बता दिया तो दोस्तों ने कहा कि तुम दूसरी बस में जाकर देखो शायद वह दूसरी बस में मिल जाए लेकिन कॉलेज का समय बदलकर और अलग-अलग बस में तन्वी ने जाना आरंभ कर दिया तन्वी हर रोज बस बदलती हर रोज कॉलेज का टाइम बदलती लेकिन वह लड़का नहीं मिला उस लड़के का पता तन्वी को नहीं मिला तब तनवी को एहसास हुआ कि प्यार तो सबको होता है। पर पता नहीं चलता कब हो जाता है और जब तक हमें एहसास होता है तब तक समय निकल जाता है और तन्वी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ (हम से किसी ने पूछा क्यों इतना दर्द लिखते हो ऐसा भी क्या शिकवा हमसे हमने भी मुस्कुराकर कहा कहा कोई दे जाए इस चेहरे को हंसी ऐसा भी तो कोई नहीं मिला)

डॉ. सरिता यादव( हिंदी व्याख्याता )

राजकीय महाविद्यालय

जाटौली हेली मंडी (हरियाणा)

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