ग्राम टुडे ख़ास

“ऐ! जिंदगी”

प्रियंका दुबे ‘प्रबोधिनी’

तू क्यों इतनी…
विरोधाभाष..भरी है…
ऐ!! जिंदगी..!!
जिसे पाया ही नही..
उसे खोने से डरती है..!
जो मिला है…
उसे सहेजकर..
सजोने से डरती है..!
जज़्बातों के..
तूफानी…बीज..
हृदय में अपने..
बोने से डरती हैं..!
रखती है आँखों में ..
आब का सैलाब….
और ये क्या…!
फिर रोने से डरती है…!
तह लगाकर यादों की..
धूमिल चादर को..
अपने दिल की आलमारी में
संजोकर धरती है…।
दर्द भर के सीने में..
और मुस्काने की जिद्द
चेहरे से करती है…!
तू क्यों इतनी…
विरोधाभाष भरी है..
ऐ!! जिंदगी..!!
जिसे पाया ही नही..
उसे खोने से डरती है..।

प्रियंका दुबे ‘प्रबोधिनी’
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!