ग्राम टुडे ख़ास

औरत

आकांक्षा सिंह

वो औरत है मैंने उसे बदलते देखा है
उसके सपने को पांवों में पायल पहनते देखा है
उसके चेहरे पे मुस्कराहट और आँखों में दर्द देखा है
वो औरत है मैंने उसे बदलते देखा है

आज के दिन (मातृ दिवस) पन्नो में लोगो को उसे,मजबूत लिखते देखा है
उसकी मजबूती को मज़बूरी में बदलते देखा है
उसकी हुनर को उसके सुन्दरता से दबते देखा है
वो औरत है मैंने उसे बदलते देखा है

उसकी इज़्ज़त को बेआबरू करते देखा है
उसको पैरो की जूती भी समझते देखा
इन सब के बाद भी उसको मैंने हस्ते देखा है
अरे भाई वो औरत ही है जिसको मैंने बदलते देखा है ।

   आकांक्षा सिंह 
   वाराणसी*औरत*


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