ग्राम टुडे ख़ास

कभी सोचा ना था मां

सपना कुमारी

अरे ओ शहजादी पैर कब्र के पांव मे है तू क्यों मुंह छुपा कर बैठी है आते जाते राहगीरों से क्यों नहीं मानती देखो तो कैसे चेहरा हो गया है चार दिन से खाई पी नहीं हो तेरे लिए कोई फरिश्ता नहीं आने वाला जो तुझे होटल में ले जाकर खिलाएगा। कोई एक रुपया कोई 5 रुपयादेकर चला जाता है वस आते जाते राहगीरों को सुने नजर से देखती रहती है बस्ती में नई आई है ना तभी एक दूसरी भिखारी महिला बाल को खुजलाते हुए बोली इसको पता नहीं है जो पैसे मिलते हैं वह भी बहुत मुश्किल से मिलता है। तभी वह बूढ़ी फटिहाल सी मैली कुचली साड़ी जो जगह-जगह फट गई थी पैर में कांटे चुभे हुए थे और खून भी बह रहे थे डंडे के सहारे उठते हुए बोली हे नाथ क्या दिन दिखा रहे हो अब यही दिन बाकी रह गए थे । वह भिखारी बुढ़िया गुस्से से डंडे से हटाते हुए बोली चल हट भिखारी कही की मैं तुझे भिखारी दिखती हूं क्या तुझे पता नहीं है मैं बहुत बड़े घर की हूं मेरा बेटा डॉक्टर है मेरे दो बेटे हैं एक दरोगा है। भिखारियों के झुंड मे हंसी के ठहाके गूंज उठे। एक भिखारी बुड्ढे ने कहा सठिया गई है यहां खाने को लाले वाले हो रहे हैं इसे हंसी ठिठोली सुझती है। चल चल इसका बड़ा बाबू बेटा आएगा हम लोग को होटल ले जाकर खाना खिलाएगा यह कहकर आसपास वाले भिखारी खिल्ली उड़ाने लगे। तभी पुलिसवाला स्टेशन पर से हटाते हुए कहा चलो यहां से यात्रीगण को जाने में दिक्कत हो रही है साले चोरी चमारी करते हैं भीख मांगने के नाम पर तभी बुढ़िया जोर से चिल्लाई मैं चोर नहीं हूं मैं भीख नहीं मांगती मेरा बेटा बड़ा बाबू है बहुत ऊंचे ओहदे पर है मेरे बेटे को पता चलेगा तुझे जेल भिजवा देगा। पुलिस ने झिड़कते हुए कहा जा यहां से ……
भिखारियों का आजकल बहुत मन बढ़ गया है साहब जो मन में आता है बोल देते हैं। तभी नित्य की भांति आकाश सीढ़ियों से स्टेशन पर चढ़कर दूसरे प्लेटफार्म पर जा रहा था मन ही मन सोच रहा था रोज-रोज मैनेजर की बातें सुननी पड़ती है हमेशा लेट हो जाता हूं तभी उस भिखारी महिला की आवाज उसके कानों में टकराए उसने सरसरी नजर से एक नजर उस महिला पर डाली फटे मैले-कुचैले वस्त्रों में वह बुड्ढी भिखारी महिला की आंखों से आंसू बह रहे थे देखने से लग रहा था वह महिला भिखारी नहीं है पता नहीं आकाश को उस महिला में अपनी मां नजर आई उसे देख कर ऐसा लगा जैसे उससे कोई आत्मीय संबंध हो। बेटा तेरे जैसा मेरा पोता है वह बुजुर्ग भिखारीन उसके पास आकर गिड़गिड़ाने लगी मेरी मदद करो मुझे घर पहुंचा दो बहुत दिनों से भूखे प्यासी हूं भगवान तुम्हारा भला करेगा। आकाश के कदम ठिठक गए अचानक घबरा गया समझ में नहीं आ रहा था ऑफिस के लिए देर हो रही है इधर एक भिखारिन बुढ़िया मदद मांग रही है उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था करें तो क्या करें। बेटा मुझे औरंगाबाद जाना है मैं अपने बेटे के साथ हरिद्वार घूमने आई थी हरिद्वार कुंभ मेले में बहुत भीड़ थी मेरा हाथ छूट गया था और मैं बिछड़ गई मैं अनपढ़ हूं मुझे कुछ नहीं पता मैं कहां हूं आप कहां के रहने वाले हो मुझे आपकी भाषा जैसे मैं बोलती हूं वैसा ही लग रहा है मुझे घर पहुंचा दो भगवान तुम्हारा भला करेगा। माताजी यह केरल है आप इतनी दूर कैसे पहुंच गए औरंगाबाद कहां बेटा मुझे यह नहीं पता है पर गया के आस-पास पड़ता है तुम्हारी भाषा मुझे समझ में आ रही है। यह कह कर वह जोर जोर से रोने लगी माताजी फोन नंबर है बेटा मैं अनपढ़ हूं जो कुछ मेरे पास सामान था चोरी हो गई बस इधर-उधर भटक रही हूं यह कहते हुए उसकी आंखों में अंधेरा छाने लगा और बदहास से देखने लगी। आकाश ने कहा चुप रहिए अम्मा जी मैं आपको आपके बेटे के पास जल्द पहुंचा दूंगा। उसने फटाफट मैनेजर के पास फोन लगाते हुए कहा सर मेरी तबीयत ठीक नहीं है मैं दो-चार दिनों बाद ऑफिस आऊंगा। आकाश ने उस महिला को अपने घर लेकर आया और पत्नी को सब समाचार बताया पत्नी ने कहा घबराइए नहीं अपना घर है हम लोग भी वही के है। आकाश ने तुरंत पुलिस को सूचना दिया कुछ दिनों बाद वह बुजुर्ग महिला की बेटे बहू त्रिवेंद्रम पहुंचे। मां बेटे की वह मिलन बेटे और मां की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा था। आकाश के आंखों में भी खुशी के आंसू बहने लगे।….

सपना कुमारी

बिहार

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