ग्राम टुडे ख़ास

क्षतिपूर्ति

सुमित कुमार गुप्ता

शान्ति नगर हाउसिंग सोसाइटी में आज प्रात: काल से ही अशान्ति का माहौल व्याप्त था। सोसाइटी में नवप्रवेशी एक परिवार के मुखिया जो कि अपने पड़ोसियों के समक्ष अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए हनक को स्थापित करने को लेकर प्रयासरत थे। एक बेज़ुबान वृक्ष को काटने के विषय को उन महोदय ने अपनी कथित प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था क्यों कि सड़क किनारे वृक्षारोपण अभियान के अन्तर्गत रोपित किया गया वह वृक्ष आज उन महोदय की आलीशान कोठी की शोभा में चार चांद लगाने में सबसे बड़ा बाधक जो बन गया था। सोसाइटी मे घर लेते समय से ही यह वृक्ष उन महोदय की आँखों की किरकिरी बना हुआ था और महोदय उस समय से ही निरंतर उस वृक्ष के अस्तित्व को मिटाने का षड़यंत्र रच रहे थे, लेकिन सोसाइटी के कुछ बुद्धिजीवियों व पर्यावरण प्रेमियों के तीव्र विरोध के कारण वह अपनी योजनाओं में लगातार विफ़ल साबित हो रहे थे, परन्तु आज उन महोदय के बिगड़ैल बेटे के कारण उनको उस वृक्ष को काटने का एक सुअवसर प्राप्त हो गया था, बीती रात भयंकर नशे में धुत उन महोदय के साहबजादे ने अपनी बेशकीमती कार को उस वृक्ष से टकरा दिया था, उसके बाद से ही उनके परिवार का प्रत्येक सद्स्य उस वृक्ष को वहाँ से हटाने के लिए लामबंद हो गया था।उन सभी का तर्क था कि इस वृक्ष के कारण परिवार के सद्स्यों को भयंकर असुविधा का सामना करना पड़ता है, अत: अब इस वृक्ष को यहां से हटना चाहिए । उसी क्रम में आज प्रात: काल से ही उन महोदय ने दो मज़दूरों को कुल्हाड़ी व आरी समेत बुलाकर वृक्ष को कटवाना प्रारंभ कर दिया था।वृक्ष पर अंधाधुंध कुल्हाड़ी व आरी के प्रहार होते देख आस – पास के लोगों ने अपना – अपना विरोध दर्ज करवाना शुरू कर दिया था। लेकिन उन महोदय ने सभी के विरोध को अनसुना करते हुए कहा कि ” मैं भी देखता हूँ विश्व की कौन सी शक्ति मुझे आज इस वृक्ष को कटवाने से रोकती है।” इस वृक्ष के कारण मुझे और मेरे परिवार को अब तक बहुत सा नुकसान उठाना पड़ा है और कल रात तो जो हुआ उसकी तो कोई सीमा ही नहीं थी, इस वृक्ष के कारण मेरे बेटे को कितनी चोटें आयी हैं और कार में भी कितनी टूट – फ़ूट हुई है, नुकसान का आँकलन कोई भी मेरे बेटे की स्थिति व कार की दशा को देखकर सरलता से कर सकता है।उन महोदय की बातों को सुनकर पास में ही खड़े एक पर्यावरणविद् बोलते हैं, “साहब क्यों आप अपने बेटे की गलतियों पर पर्दा डालकर सारा दोष इस वृक्ष के सिर पर मढ़ रहे हैं ? आपका होनहार सुपुत्र नशें में धुत होकर कार चला रहा था, यह दृश्य सोसाइटी के प्रत्येक परिवार ने देखा था।” मान्यवर जो आप इस वृक्ष के कारण हुए अपने नुकसान का वर्णन हमारे मध्य कर रहे हैं तो क्या आप जानते भी हैं ? कि इस वृक्ष ने अब तक आपको और हम सभी को कितने अमूल्य अप्रत्यक्ष व प्रत्यक्ष उपहारों जैसे ऑक्सीजन, फ़ल, फ़ूल,छांव प्रदान कर लाभान्वित किया है और भाई साहब आज आप जो इस वृक्ष को इतना जी भरकर कोस रहे हैं गर्मियों में इस वृक्ष की छांव तले ही आप अपनी कार को हमेशा की तरह खड़ा करते हैं। हम सभी आपको इस वृक्ष की हत्या जैसे घोर निंदनीय कृत्य को किसी भी क़ीमत पर कारित नहीं करने देंगे और आपसे हमारा यह विनम्र निवेदन है कि आप भी इस पाप के भागी न बने तो यह आपके व आपके परिवार के लिए बेहतर रहेगा।इतना सुनते ही तो मानो उन महोदय का पारा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था, उन महोदय ने पर्यावरणविद् की बातों का प्रतिरोध करते हुए कहा कि “मुझे ज़्यादा ज्ञान व प्रवचन देने की आवश्यकता नहीं है आज बस यह वृक्ष कटकर रहेगा, जिसको जो करना है वह कर ले”। और उन महोदय ने मज़दूरों को डाँटते हुए कहा कि तुम लोग यह सब फ़ालतू की बातें क्या सुन रहे हो ? जिस काम के लिए आये हो उस काम को करो। इतना सुनकर मज़दूरों ने अपना काम करना शुरू कर दिया, वृक्ष पर कुल्हाड़ी व आरी चलते ही आस – पास एकत्रित कुछ लोगों ने तुरंत इस घटना की फ़ोटो खींचाना और वीडियो बनाना शुरू कर दिया था और कुछ लोगों ने तत्काल वन विभाग, पुलिस – प्रशासन के उच्चाधिकारियों, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों व मीडिया को घटना से अवगत कराया। घटना की गंभीरता को भांपते हुए सभी घटनास्थल पर पहुँच जाते हैं।घटनास्थल पर लोगों के जमावड़े के बाद वह महोदय लोगों को अपनी हेकड़ी दिखाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से सभी को देख लेने की धमकी देते हैं। लेकिन लोगों के विरोध व वन विभाग, पुलिस – प्रशासन के उच्चाधिकारियों द्वारा कठोर कार्यवाही की चेतावनी के बाद उन महोदय के सुर कुछ नर्म पड़े थे।अगले ही पल उन महोदय ने वहाँ उपस्थित सभी के समक्ष स्वयं की दाल न गलते देख अपना पैंतरा बदलते हुए एक नया प्रस्ताव लोगों के समक्ष रखते हुए कहा कि आप सभी इस वृक्ष को कट जाने दीजिए इस वृक्ष की क्षतिपूर्ति करते हुए मैं किसी अन्य स्थान पर दो वृक्षों को रोपित करा दूँगा। उन महोदय के इस आधारहीन प्रस्ताव को सुनकर वहाँ उपस्थित लोग बहुत आक्रोशित हो जाते हैं। मौक़े की नज़ाकत को देखते हुए वन विभाग, पुलिस – प्रशासन के उच्चाधिकारी तत्काल मज़दूरों को काम रोकने का आदेश देते हैं और उन महोदय को भविष्य में इस तरह के पर्यावरण विरोधी कार्यों को न करने की चेतावनी देते हुए घर के अंदर जाने को बोलते हैं।

-: सुमित कुमार गुप्तानिवासी

 – कानपुर नगर (उ.प्र.)मो. नं. -: 95982270498564971711

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