ग्राम टुडे ख़ास

खिताब उनको हो मुबारक

शास्त्री सुरेन्द्र दुबे अनुज जौनपुरी

गलतियां दूसरों में शायद,
ढ़ूंढ़ना बहुत आसान है।
यह जहां में निकम्मेपन की,
सबसे बड़ी पहचान है।।

ज़मीं से उठकर जब हम ,
खड़े होने की करते कोशिशें हैं।
टांगखींचने की तरफ वो, रखते हमेशा ध्यान हैं।

सामाजिक दृष्टि में उन्हें ,
महा तमगा दिया जाता है।
करते है ऐसा काम जो,
टंगखिचवा कहा जाता है ।।

कहतें हैं लोग कि यह, बड़ी लाईलाज बीमारी है।
गुजर जाती है उमर,
ऊर्जा लग जाती सारी है।।

सफलता असफलता पर,
अपनी पैनी नज़र रखते हैं।
करतें हैं पुरजोर कोशिशें,
खबरदार किया करते हैं ।।

टांग खेंचते हैं वे ,
प्रयास करनेवालों की।
गलतियां ढ़ूढ़ते रहते हैं,
असफल होनेवालों की।।

बढ़कर संघर्ष पथ जब,
हम कामयाब होते हैं।
कहानी लिखते हैं वही,
और लाजवाब होते हैं।।

एक शिक्षक परीक्षक की तरह,
हर काम अंजाम देते हैं।
संघर्ष करने वालों को,
इक नया आयाम देते हैं।।

अनुज कहतें हैं कि,
उन्हें उनका काम करने दें।
बुराई अच्छाई के ,
कसीदे उन्हें ही पढ़ने दें।।

बढ़ो मंजिल की तरफ तूं,
बस मस्त मौला बन अपने।
खिताब उनको हो मुबारक,
हम उनको प्रणाम करतें हैं।।

@काव्यमाला कसक
शास्त्री सुरेन्द्र दुबे अनुज जौनपुरी

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