ग्राम टुडे ख़ास

गज़ल

डाःमलय तिवारी
तुम मुझे यूँही रुलावोगे, उम्र भर तो नहीं।
ये कहीं तेरी बेवफ़ाई का, असर तो नहीं।
ये सिलसिला रुठनें मनाने का चल रहा कबसे,
चलो अच्छा है किसी को, अभी खबर तो नहीं।
दरदे दिल बढ़ रहा है रोज, ये दवा कैसी,
उसने मरहम जो लगाया, कहीं ज़हर तो नहीं।
बाद मुद्दत के कोई आशना भी हुआ है मुझसे,
शकून है तुम पर किसी की अभी नज़र तो नहीं।
यही मुहब्बत का जुनू, शम्मा पर जलते परवाने,
मरकर “मलय इश्क में, रखते कोई कसर तो नहीं।।
डाःमलय तिवारी बदलापुर

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