ग्राम टुडे ख़ास

ग़ज़ल

सुभाषिनी जोशी ‘सुलभ’

इस दर्द भरी दुनिया को हँसाने का समय आ गया।
ओठों पर हँसी व मुस्कान लाने का समय आ गया।

हर दिल के अन्दर छुपे अपने ही दुख दर्द होते हैं,
तपते हुए हृदय की आग बुझाने का समय आ गया।

कब तक गुमसुम बैठे अपने आप में घुटते रहोगे,
मन के हालात दुनिया को सुनाने का समय आ गया।

कब तक झूठे दिलासे देते रहेंगे अपने आप को,
अब सच शिद्दत से सामने बताने का समय आ गया।

किस वजूद या मकसद से जी रहें इस जहान में लोग
इन्सां की सोई तकदीर जगाने का समय आ गया।

सुभाषिनी जोशी ‘सुलभ’
इन्दौर मध्यप्रदेश

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