ग्राम टुडे ख़ास

ग़ज़ल

किरणमिश्रा “स्वयंसिद्धा “

हम “प्यार” में जिनके नाकाम हुए बैठे हैं।
“दर्द”दे के महफिल में वो अंजान बने बैठे हैं।

जताते तो है प्यार है “बेइन्तहाँ” हमसे पर,
इसका भी गैरों में ही “ऐलान” किये बैठे हैं।

पुकारते है “पत्थर-दिल” जो हमें जमाने से,
खुद “मोम” होकर भी “पाषान” बने बैठे हैं।

जुदा करते हैं रोज “खुद” को मेरी साँसों से,
फिर भी आँखों में देखो “दरबान” बने बैठे हैं।।

टूट कर डूब रही “जिनमें” दिल की धड़कन,
साहिल होकर भी #किरण “तूफान” बने बैठे हैं।।

किरणमिश्रास्वयंसिद्धा

नोयडा

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