ग्राम टुडे ख़ास

गीत

सुनीता जौहरी

तिमिर सघन यह छंट जाएगा
नव विहान नूतन मुस्कुराएगा ।।

दे रही संदेशा नव प्रभात यह
मेघों के गुंजन में नित सुबह
मुस्कान जगा एक दीप जला
धरती गगन मानों हिला-हिला
रुनझुन गुनगुन किरण गुनगुनाएगा
तिमिर सघन यह छंट जाएगा
नव विहान नूतन मुस्कुराएगा ।।

अनंत नाद धवल वसन के संग
भरो उम्मीदों का प्रकाश तरंग
हैं प्रकृति की अद्भुत कलाकारी
करें नित नव अनुपम चित्रकारी
सुरभित मधुरम विश्व जगमगाएगा
तिमिर सघन यह छंट जाएगा
नव विहान नूतन मुस्कुराएगा ।।

माना मानव जीवन सरल नहीं है
पर क्या मानव मन धवल नहीं है?
कहत रवि उदय होकर निशिदिन
क्या नीलगगन अब सजल नहीं है?
आशा की क़श्ती जीवन पार लगाएगा
तिमिर सघन यह छंट जाएगा
नव विहान नूतन मुस्कुराएगा ।।


सुनीता जौहरी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

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