ग्राम टुडे ख़ास

चाय पीने के लिए

डॉ अर्चना पाण्डेय

चाय पीने के लिए घर आपके हम आए हैं
सौ बहाने ढूंढकर कर हम मुस्कुराने आए हैं

चुटकुले पढ़कर भी अपना मुँह जो लटकाए हैं
हम उन्हें वो चुटकुला फिर से सुनाने आए हैं

यार ऐसे थे ठहाके जो लगाते बेवजह
खोजकर लम्हें पुराने आज फिर हम आए हैं

बे वजह हँसने की आदत थी हमें ऐसी लगी
पागलों को मात दे दे वो हँसी फिर लाए हैं

गीत ग़ज़लों की भरी महफ़िल में पीछे बैठ कर
कहकहों से आज दिल अपना सजाने आए हैं

देश में, उपदेश में ये मन मेरा लगता नहीं
हम तो अपने दोस्तों से दिल लगाने आए हैं

क्या हुआ जो मौसिकी हमने कभी सीखी नहीं
गायकी आती नहीं पर गुनगुनाने आए हैं

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