ग्राम टुडे ख़ास

चार मुक्तक

कवि मनोहर सिंह चौहान मधुकर
01
तुमसे बिछुड इधर उधर डोल रहा हूं।
इस बहाने पंखो को तोल रहा हूं।।
जब तक न मिलो मै ढूंढता ही रहूंगा-
नजर आ जाओ मनहर बोल रहा हूं।।

02
प्यास बुझती नहीं बरसात चली जाती है।
तेरी याद कर के घात चली जाती है।।
तेरे वादे पर ऐतबार किए बेठे है –
ये पवन भी बिन किए बात चली जाती है।।

03
नौकरी छोड़कर कवि बन गया हूं मै।
घर से निकल दुनिया बन गया हूं मै।।
अब ढेरों चिंताएं सताती मुझको –
जबसे मोबाइल मेन बन गया हूं मै।।

04
मेरी पूजा भी तुम मेरा ध्यान भी तुम हो।
मेरी हर खुशी का मनमोहक गान तुम हो।।
मेरी सांसे तुम हो तुमसे है जिंदगी भी –
मेरा जां तुम मेरी अदद पहचान तुम हो।।


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