ग्राम टुडे ख़ास

चोर चोरी से जाए हेरा फेरी से न जाए

लोकोक्तियों पर आधारित कहानियांँ

वंदना शर्मा

एक बार एक सौदागर किसी काम से पैदल निकला, रास्ते में उसे एक कुम्हार मिला जो अपने गधे को हांकते हुए ले जा रहा था। सौदागर की नजर गधे के गले में टंगे हुए पत्थर पर पड़ी। उसने कुम्हार से पूछा क्यों भाई तुम मुझे इस पत्थर को बेचोगे?
कुम्हार ने कहा क्यों नहीं, मैंने तो ऐसे ऐसे ही गधे के गले में पहना दिया था। आप खरीद रहे हैं तो पूरा ₹1 लूंगा आज गधे की तरफ से बच्चों को मिठाई खिला दूंगा और गधे के गले से वजन भी कुछ हल्का हो जाएगा।

सौदागर ने कहा, नहीं मैं तुम्हें इसके 4 आने दूंगा, कुम्हार ने कहा छे आने से कम न लूंगा।
कुम्हार ने मना कर दिया
दोनों चल पड़े
कुम्हार को लगा सौदागर आवाज लगाएगा,
सौदागर को लगा कुम्हार आवाज लगाएगा
जब बात हाथ से निकल गई तो सौदागर पछताने लगा की पत्थर तो बहुत कीमती था वह पीछे पीछे गया उसने देखा कुम्हार अपना कोई काम कर रहा है गधा एक जगह बंधा हुआ है, उसने कहा है वह पत्थर कहाँ गया? कुम्हार ने कहा आप तो छः आने देने को तैयार न थे और देखिए मैंने पूरे ₹1 में बेचा है।

सौदागर आग बबूला हो उठा कहने लगा तुम हो निरे गधे ही गधे अरे! तुम्हें मालूम है उसेकी कीमत लाखों में थी वह हीरा था।

कुम्हार ने कहा मैं तो जो गधा हूंँ सो हूंँ तभी तो गधे के गले में इतना कीमती पत्थर लगता है घूम रहा था पर आपको क्या कहूं जब आपको पता था उसी कीमत तो आप छःआने देने को भी तैयार न थे।

सौदागर ने कहा ःदेखो लालच सबके मन में होता है जब कोई चीज इतने कम दाम में मिल रही है चाहे वह आधे दाम ही क्यों ना हो मोल भाव फिर भी करता हूंँ चोर चोरी से जाए हेरा फेरी से ना जाए।

तो जौहरी को परख होते हुए भी उसने लालच के कारण इतना अच्छा सौदा गवा दिया।

इसी प्रकार यदि किसी को धर्म या कर्तव्य ना पता हो तो क्षमा करने योग्य है किंतु वह जौहरी की तरह जानता है और फिर भी उसका जीवन ना बदले तो उसे क्या कहेंगे?

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One Comment

  1. लेखिका की शब्दो पर लाजवाब पकड़ है । मज़ा आ गाया

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