ग्राम टुडे ख़ास

जीवन

डॉ पंकजवासिनी

विविध बहुरंगी है ये जीवन!
प्रभु प्रदत्त अनुपम उपहार!!

नौ मास तक तिल तिल तप करके!
मांँ बनती प्रभु-सी सृजनहार!!

नर! क्षणभंगुर है ये जीवन!
कर्म पुष्प – सा हो :जगत् वंदन!!

जीवन सुख दुख का सतत् संगम!
शूल बिच पुष्प का अद्भुत मिलन!!

कर्तव्य पथ पर चलना सहास!
कभी न होगा तेरा उपहास!!

नग-सा अटल तुम साहस धरना!
विपत्ति – सागर धीरज से तरना!!

जीवन कब सरल रहा किसी का???
कंकरीली पथरीली राहें!!

जो इस पर चला संत-सम अडिग!
भरा कब संसारी-सम आहें!?!

हंँसो और औरों को हंँसाओ!
काम अविस्मरणीय कर जाओ!!

द्वेष घृणा हिंसा वैमनस्य तज!
कर प्रेम, परहित बलि- बलि जाओ!!

प्रभु सौंपे जो जीवन चादर!
माया लिप्त न मैली बनाओ!!

कुछ ना रखा नश्वर जीवन में!
प्रभु पद गह नर भव तर जाओ!!

कुल वह खंड हम :उसकी ज्योति!
लौ लगी नित :विरह पीड़ होती!!

डॉ पंकजवासिनी
असिस्टेंट प्रोफेसर
भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय*

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