ग्राम टुडे ख़ास

जो आत्मिक है वही अद्भुत है वही प्रेम है

ख़ुशबू पाण्डेय

साधारण लोग जो देखते रहते हैं
बस बाहर-बाहर और सिमटे रह जाते हैं
एक बाहरी भौतिकतावादी जीव बन कर
वो नहीं देखते हैं भीतर बह रही संवेदनशील
आत्मिक भावनाओं की ओर
देखना तो दूर झांकते भी नहीं हैं,
वो डरते हैं बंट जाने से
या यूं कहूं बांट दिए जाने से,
बांट दिया जाना यानि अलग कर दिया जाना
उन लोगों से उन्हीं लोगों द्वारा जो साधारण हैं
और देखते रहते हैं बस बाहर-बाहर…
वो डरते हैं बांट दिए जाने से
किसी विशेष समुदाय या वर्ग में
उन लोगों द्वारा जो साधारण हैं और
उन्हें सब कुछ अपने जैसा साधारण ही
समझ आता है और स्वीकार्य होता है
उन्हें नहीं पता हर जीव में
एक संभावना होती है साधारण से
अद्भुत हो जाने की…
बाहरी दैहिक व्यवस्था से निकल कर
आत्मिक व्यवस्था और भावनाओं में
रच बस जाने की,
हर जीव में संभावना होती है कि
वो अनुभव और आदर करने योग्य हो जाये
अपनी आत्मिक अनुभूतियों का।

साधारण लोग जो देखते रहते हैं
बस बाहर-बाहर और सिमटे रह जाते हैं
एक बाहरी भौतिकतावादी जीव बन कर
वो बांट सकते हैं मनुष्य को, प्रेम को,
मानवता को, भावनाओं को यहां तक कि
हमने ईश्वर को भी बांट दिया
लेकिन हम नहीं बांट सकते आत्मा को
और जो आत्मिक है वही अद्भुत है
वही प्रेम है, क्यूंकि आत्मा का कोई
लिंग या जाति नहीं है न है कोई समुदाय
वो बस उर्जा है और जो इस ऊर्जा का आदर
करते हुए आत्मिक हो जाता है वो
इस बाहरी दुनिया में बांट दिए जाने के बाद भी
एक हो जाता है अद्भुत ऊर्जा से
भीतर बह रही संवेदनशील
आत्मिक भावनाओं से और
जो आत्मिक है वही अद्भुत है
वही प्रेम है।

  • ख़ुशबू पाण्डेय
  • लखनऊ

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!