ग्राम टुडे ख़ास

डरने लगा हूँ

नीलम राकेश

डरने लगा हूँ
अकेलेपन से,
हाँ, डरने लगा हूँ
अपने अकेलेपन से।

तलाशता था कभी
एकांत मैं,
ढ़ूंढ़ता था
शांति !

प्रिय,
बहुत प्रिय
थी, शान्ति
तब मुझे।

अब
तलाशता हूँ
शोर-गुल,
चहल- पहल ।

डराता है
बहुत
मुझे,
एकांत अब!

उड़ गई है
एकांत की शांति
जाने कहाँ!
डरने लगा हूँ
अकेलेपन से!

बस गई है
उसमें
अकेलेपन की छटपटाहट!
घबराने लगा हूँ
मैं,
एकांत को तलाशता
था कभी,
अब अपनों को
तलाशता हूँ।

हाँ,
डरने लगा हूँ
मैं……
अपने अकेलेपन से
डरने लगा हूँ !

नीलम राकेश
610/60, केशव नगर कालोनी सीतापुर रोड, लखनऊ

उत्तर-प्रदेश-226020 neelamrakeshchandra@gmail.com

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