ग्राम टुडे ख़ास

डॉ अनुज कुमार चौहान ‘अनुज’ की रचनाएं

गजल –रहनुमा

ख्वाब जैसी सजी ,सादगी आपकी ।
भोर भी अब लगी,शाम सी आपकी ।।
अंक मिलते रहे ,जख्म सिलते रहे ।
शब्द ही ना मिले ,जिन्दगी आपकी ।।
जीत के दौर में,प्रीत के शोर में ।
मीत संसार में,बन्दगी आपकी ।।
दूरियाँ ही दवा,गा रही हर गली ।
भाल पर सलवटें ,बेबसी आपकी ।।
नाव मझधार में,चाह पतवार की ।
रहनुमा सी दिखे ,इक हँसी आपकी ।।

वीर छन्द (आल्हा)–
” जगह-जगह पौधे लगवादें ”

हम लेलें संकल्प सुहाना,फर्ज कर्ज सम धर्म करार ।
चारों ओर दिखे हरियाली,मिले हवा का प्यार-दुलार ।।
मानवता रक्षित जिनसे हो,वेद कहें अनुपम उपहार ।
सुन्दर मोहक जीवन देते,लाते सुखद- सुबह संसार ।।
सच में सच्चे राजा जैसे,ऑक्सीजन देते भरमार ।
फल-फूलों के सगुण प्रदाता,वर्षा लाने के हथियार ।।
वातावरण शुद्ध हो जाये,सहज हिफाजत के हकदार ।
प्रण लें पेड़ कभी ना काटें ,पूजें देव-रूप साकार ।।
सुत हम सच्चे वीर बनेंगे,दे दें माता का अधिकार ।
जगह-जगह पौधे लगवादेँ,धरा चाहती है उपकार ।।

डॉ अनुज कुमार चौहान “अनुज”
अलीगढ़ , उत्तर प्रदेश ।

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