ग्राम टुडे ख़ास

डॉ मंजु सैनी की कलम से

कहती बूंदे बारिश की

गजल नई छेड़ जाती हैं बूंदे देखो बारिश की
बूंदे देखो बारिश की उमांग नई दे जाती हैं
पत्तों को धो कर नई लहर दे जाती हैं
गिरती बूंदें बारिश की आवाज सुहानी होती हैं
मनभावन सी लगती,बूंदे देखो बारिश की।

खुश आज देखो प्रकृति लहराती सी दिखती हैं
मौसम बड़ा सुहाना सा समेटे यादों की याद दिलाता है
लुका-झुपी बादलों की, विरह को और बढ़ाता हैं
दिल को सुकून देती मदमस्त मौसम की फिजायें हैं
मनभावन सी लगती हैं बूंदे देखो बारिश की

गिरते ही बूंदे जीवन की नई कहानी कहती है
बूंदों की झमाझम आवाजें मचलती दिखाई देती हैं
दिल की धड़कनों में साज दे गीत नया बन जाता हैं
पहचानी सी आवाज प्यारी कोलाहल सा करती हैं
मनभावन सी लगती हैं बूंदे देखो बारिश की

बारिश में प्रियतम तेरी याद न जाने क्यूँ सताती हैं
रिमझिम बूंदों में नहाना बरबस याद दिलाती हैं
गुमसुम सी मैं हो जाती हूँ जब याद पुरानी आती हैं
वे साथ बिताए हुए लम्हे याद तुम्हारी दे जाते हैं
मनभावन सी लगती हैं बूंदे देखो बारिश की

स्त्री

स्त्री धीरता की मूरत हैं
धैर्य की पूर्णता हैं
सृष्टि की सृजना हैं
प्रकर्ति की संचालिका हैं।

संस्कार पूरित गीता हैं
सहज व्यक्तित्त्व मूरत हैं
स्वभाव में गहनता हैं
अपनो का विश्वास हैं।

अन्याय के विरुद्ध हैं
सरल शुद्ध स्वभाव हैं
परिवार की वहन कर्ता हैं
स्नेह ह्र्दय में भरा है।

प्रकति की मंगल मूरत हैं
काव्य की शब्द रूप हैं
दुखो की संहारक हैं
प्यार की प्रतिमूर्ति हैं।

सब पर प्यार लुटाती हैं
अपना मान बढ़ाती हैं
हर क्षेत्र में नाम करती हैं
लेखनी भी चलाती हैं।

डॉ मंजु सैनी
गाज़ियाबाद

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!