ग्राम टुडे ख़ास

दीप बनो

पिंकी सिंघल

तम सबके जीवन का हरता
हर मन में खुशियां जो भरता
दिल में एक उम्मीद जगाकर
राह सबकी वो रोशन करता

खुद जलकर जग को चमकाता
भगा तिमिर प्रकाश फैलाता
जगा दिल में असीम आशाऐं
वो सबको जीना सिखलाता

जैसे चंदा आकाश में छाता
देख जिसे मन सबका हर्षाता
वैसे ही वो भी तो हरदम
पुलकित हृदय को कितना भाता

छूटें अपनों की याद दिलाता
कभी घावों पर मरहम है लगाता
असंभव को भी संभव कर दे जो
आख़िर वो ही तो दीपक कहलाता

पिंकी सिंघल
अध्यापिका
शालीमार बाग दिल्ली

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!