ग्राम टुडे ख़ास

धूम्रपान निषेध

ऋषि तिवारी “ज्योति

यह समाज किस ओर जा रहा,
तनिक समझ नहीं आता है ।
जो निषेध है जीवन में,
वहीं सभी को भाता है ।

जो हानि करे नुकसान करे,
जो पूरा चरित्र बदनाम करे,
वहीं चीज क्यूं पता नहीं,
यह समाज अपनाता है ।

अपनो के संग बैठ रौब से,
सिगरेट जलाया जाता है ।
सगे संबंधी दोस्त यार को,
सप्रेम पिलाया जाता है ।

अब तो ऐसा समय आ गया,
मन संकुचित हो जाता है ।
देख खुली बोतल शराब का,
जब शुभ कर्मों में आता है ।

जब शराब पी सभी साथ में,
यह समाज सो जाएगा ।
तो अपनों के इज्जत कैसे,
कोई इंसान बचाएगा ।

चाहे क्षेत्र कोई भी हो पर,
नहीं अछूता इससे है ।
प्रचार प्रसार कर धूम्रपान को,
अच्छा दिखलाया जाता है।

अब दुग्धपान में शर्म है लगता,
न खीर कोई अब खाता है ।
व्रत में भोजन नहीं करे पर,
गुटखा प्रेम से खाता है ।

यह समाज किस ओर जा रहा,
तनिक समझ नहीं आता है ।
जो निषेध है जीवन में,
वहीं सभी को भाता है ।

✍️ ऋषि तिवारी “ज्योति”
चकरी, दरौली, सिवान (बिहार)

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