ग्राम टुडे ख़ास

नई शिक्षा

बलवान सिंह कुंडू ‘सावी ‘

आज विद्यार्थी गज़ब ढहा रहे हैं
बिना पढ़े भी पास हुए जा रहे हैं
अध्यापक चक्करघिन्नी -सा हैरान है
नई शिक्षा नीति से परेशान है
अब के बरस तो और खास हो गया
नालायक पप्पू भी पास हो गया
न केवल पास था
अंक तालिका में मेरिट के पास था
वो भी क्या कमबख्त वक्त था
कितने अथक प्रयास से सफल होते थे
सारी- सारी रात दीये के आगे ऊंगकर खोते थे
पास होना तो एक सपना था
मानो विश्वामित्र का युगों सा तपना था
बिना रुके जो जमात अगली में जाता था
सारे मुहल्ले में शंकराचार्य सा आदर पाता था
रुतबा उसका कुछ न्यारा था
पास पड़ोस नाती सबका दुलारा था
गर प्रथम श्रेणी आ जाती
सारे गांव में श्रावण सी मस्ती छा जाती
मेरिट में आना आज कहां शान है
पढ़े लिखे भी अकुशल बेरोजगार हैं
शिक्षक भी खो रहा विश्वास है
तो नई शिक्षा किस बात में खास है
क्या हुआ अगर पप्पू पास है
बेरोजगार की भीड़ में खेलता ताश है
तीस का होने पर भी वो निकम्मा है
पेट भरने का उसके जनक का जिम्मा है
रोजगार तो क्या ये शिक्षा इंसान भी नहीं बनाती
तभी तो पप्पू के पास होने पर
अम्मा तक खुशी नहीं मनाती

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