ग्राम टुडे ख़ास

नाविक

प्रीति

हे ईश्वर! नौका कर दो ,मेरी पार ।नैया पड़ी बीच मझधार, करो पार।
तुम जैसा न कोई नाविक,
जीवन नैया करते तुम पार।
जीवन के हर कष्टों में,
रहते तुम हमेशा साथ ।।
हे ईश्वर! महिमा तुम्हारी, अपरंपार।
जीवन के संकटों से ,कर दो पार ।।
गजराज की जान बचाया,
काल के मुख से खींच लाया।
हमारी नैया भी पार कर ,
करो तुम हम पर उपकार ।।

प्रीति (अध्यापिका)
मिर्जापुर ।

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