ग्राम टुडे ख़ास

नियमित समाचार पत्र पढ़ने के फायदे –

मंजूरी डेका

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है क्योंकि उसमें बुद्धि और ज्ञान है। जितना ज्ञान मनुष्य में है वह उससे कई अधिक प्राप्त करने की लिप्सा में रहते हैं और इसके लिए तरह-तरह के साधनों का आविष्कार करता है। समाचार पत्र भी इन्हीं साधनों में से एक महत्वपूर्ण साधन है। समाचार पत्र मानवीय संवेदनाओं एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान का प्रमुख साधन के रूप में प्रतिष्ठित है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र विशेष तक ही सीमित था परंतु छपाई की कला के अन्वेषणों और इसकी उपयोगिता को देखते हुए समाचार-पत्रों में समय के साथ धीरे -धीरे व्यापकता आती गई।इसमें में कई भाग होते हैं हर वर्ग के लोगों के लिए कुछ न कुछ पढ़ने को मिल ही जाता है। सामाचार पत्रों में एक ही जगह के खबरें न होकर अपितु पूरे विश्व की जानकारी मिल जाती है चाहे वह हिस्टोरिकल हो, पॉलिटिकल हो, विज्ञान से संबंधित हो, लैंग्वेज हो, फिल्म,खेल, व्यापार से संबंधित हो। साथ ही समाचार-पत्र गणतांत्रिक शासन प्रणाली के प्रमुख स्तंभों भी हैं। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने भाव, अनुभव व संवेदना को समाज एवं राष्ट्र के सम्मुख निष्पक्ष और निर्भय होकर व्यक्त कर सकता है। अखबार पढ़ने से मात्र जानकारी ही नहीं प्राप्त होती बल्कि मानसिक- बौद्धिक -विकास, चिंता -विवेचन करने की शक्ति और सहनशीलता, धैर्य व आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है और यह बात वैज्ञानिकों ने भी कहा है। इस महामारी और लॉकडोन के समय में समाचार पत्र को आप अपनी साथी बना सकते है। अगर हम देखें समाचार पत्र पढ़ने वाले व्यक्ति की चिंता करने की और किसी भी विषय को देखने की नजरिया आम लोगों से अलग होती है विक्षिप्त नहीं और उनके मित्र भी ज्यादा होते हैं। एक शोध ने यह दावा किया है कि नियमित अखबार पढ़ने वाले व्यक्तियों के मस्तिष्क आम व्यक्ति से 32 फ़ीसदी से ज्यादा सक्रिय होता है। सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस स्मार्ट युग में अखबार की गरिमा कभी कम नहीं हुई है किसी- किसी विशेषज्ञों का कहना है कि समाचार पत्र बंद हो जाएगा परंतु ऐसा संभव नहीं है क्योंकि अखबार जानकारी का स्रोत ही नहीं बल्कि विद्यार्थियों के लिए करियर में सफलता पाने की कुंजी भी है। बहुत ही कम पैसों में हमें घर बैठे ही देश विदेश की खबरें मिल जाती है। हाथों में लेकर अखबार पढ़ने से मिली ज्ञान स्मृति में जितनी स्थाई होती है उतनी स्थाई मोबाइल या इंटरनेट से पढ़ने में नहीं। पूरी संसार की समाचार विस्तार पूर्वक समाचार पत्र में मिलने के कारण यह वर्तमान परिस्थतियों से अवगत रखता है। यह हमारे परामर्शदाता और साथी दोनों होते हैं। समाचार पत्र समाज का दर्पण होता है। नियमित रूप से अखबार पढ़ने वाले लोगों की दिनचर्या नियमित हो जाती है स्कॉटलैंड में हुई एक शोध के मुताबिक जो लोग नियमित रूप से अखबार पढ़ते हैं उनका स्वास्थ्य समाचार पत्र न पड़ने वाले व्यक्तियों की तुलना में 20% अच्छी है वह तनाव मुक्त और पूरी पूरा दिन खुशनुमा रहता रहते हैं। अखबार पढ़ने से देश के, समाज के अलग-अलग विषयों में रुचि बढ़ती है। रोज अखबार पढ़ने वालों की भाषिक सुधार होती हैं। हम हिंदुस्तानियों के लिए अंग्रेजी बड़ी अच्छी तरह सीखने का एकमात्र साधन अखबार को माना गया है ; ‘द हिंदू’ जैसे मुख्य अखबार पत्र में भाषा का विशेष ध्यान रखा जाता है इसलिए आपको प्रभावशाली बलिष्ठ व्यक्तित्व की धनी बनना है तो आप आज ही से समाचार पत्र पढ़ने का सिलसिला शुरू कर दीजिए; आपको कुछ ही दिनों में फर्क नजर आने लगेगा। समाचार पत्र में भाषा सहज, सरल और सभी स्तर के पाठकों के बोधगम्य होना जरूरी है अगर ऐसा नहीं होगा तो पाठकों तक समाचार नहीं पहुंच पाएगी, समझ में नहीं आयेगा और यही उस समाचार पत्र का लोकप्रियता में बाधक कारण बनेगी। अतः जो वस्तु जितनी अधिक महत्वपूर्ण होती है उसका दायित्व भी उतना ही अधिक होता है, समाचार पत्र स्वतंत्र निर्भीक निष्पक्ष सत्य के पुजारी होते हैं लेकिन उनका लगातार जागरूक होना जरूरी है। समाज के अत्याचार अनाचार अंधविश्वास अन्याय और को कर्मों का विशेष विरोध करना है समाचार पत्र का दायित्व होता है।

मंजूरी डेका
शिक्षिका
विश्वनाथ,असम ।

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