ग्राम टुडे ख़ास

निर्मल छवि

मधु अरोड़ा

गीत तेरे मधुरम सरलम,
याद तेरी मधुरम सरलम।
हिय को बहुत सताती है,
 दिल को बहुत लुभाती है।
 गीत तेरे मधुरम सरलम,
 प्यार तेरा मधुर सरलम
 कैसे कहूं दिल धड़काता।
 प्रीति तेरी निर्मल पावन,
 छवि तेरीनिर्मल सरलम
 मनमोहक तेरा रूप प्रिय।
 बांसुरी तेरे अधर सजे,
 तान हरे दिल मेरा प्रिय।
 भक्ति तेरी निर्मल पावन,
  भव से पार करे प्रिय।
  गीत तेरे मधुरम सरलम,
  हर लीला तेरी अद्भुत प्रिय,
  भक्त  हृदय में वास करें।
  भाव भक्ति के पाले पढकर
  नियम तुम्हारे बदलते देखे।
  साग विदुर घर खाया तुमने,
  बेरो को भी चखते देखा ।
  भक्ति तेरी मधुरम सरलम,
   मन के भाव तुम पढ जाते।
   देना तेरा मधुरम सरलम,
   सृष्टि तुम अद्भुत चलाते।
    क्या कहने तेरे मधुरम सरलम,
    हर प्राणी के दिल में बसते।
    उसे नचाना मधुरम सरलम,
    सृष्टितूने अद्भुत बनाई।
    क्या कहने तेरे मधुरम सरलम,
    आकाश के नीचे न खंबा लगाया।
    पूछूं तो जल कहां से आया,
     हर काम निराला मधुरम सरलम।
     पक्षी को ऊपर उड़ते देखा,
     इंसाको यूं हीझगड़ते देखा।
     हर लीला तुम्हारी मधुरम सरलम ,
      लिखू कैसे तुम्हारी बातें,
      "मधु "तुम्हारी मधुरम सरलम।।
                       
                       
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