ग्राम टुडे ख़ास

पछतावा


लघु कथा

कुमारी चन्दा देवी

सेठ दुर्गादास नेअपने इकलौती बेटी बड़े लाड प्यार से पालकर बड़ा किया| वह अब युवा होने जा रही थी युवा होने के साथ-साथ उसे बाहरी हवा हवाई आकर्षण भी होता जा रहा था अनेकों बार वह अजनबी लड़की के साथ बाहर देखी गई पिता ने सोचा एक दो बार मुझे देखा है डर के समझ जाएगी कि मैंने देख लिया| किंतु उसकी झिझक दूर होती गई और वह लड़कों की संगत में आगे बढ़ती गई एक समय ऐसा आया कि घर के अनेकों सामानों का लापता होना शुरू हो गया सेठ जी के घर में गिरवी जेवरात का धंधा होता था और अनेकों लोगों के जेवरात घर में रखे थे| जब आवश्यकता से अधिक सामान घर से गायब होने लगा तो वह घबरा गए और उन्होंने यह बात अपनी पत्नी से कहीं और पूछा “”यह सामान कैसे गायब हो रहा है “”वह भी एक-एक करके इतनी भी कुछ तो बोल पाई बात बढ़ते-बढ़ते परिवारजनों के पास पहुंची और पुलिस तकपहुंच गई घर में कौन-कौन आ रहा है उनकी जांच पड़ताल शुरू हुई जो निर्दोष व्यक्ति बार-बार थाने में बुलाया जा रहे थे उन्होंने अब उनके ही परिवार को दोषारोपण लगाना शुरू किया कि आप अपने घर में पहले पता कीजिए यह किसकी करतूत है धीरे-धीरे पता चलने पर यह पता चला कि यह कार्य उनकी बेटी के द्वारा भी किया गया है जो किसी अजनबी लड़के को धीरे-धीरे घर का सामान देती चली आ रही है| बाद में सेठ जी ने उस लड़के को बुलाया उससे पूछताछ की सुबह बोला” कुछ नहीं यह तो मेरी बहन है और इसमें मुझे आवश्यकता पड़ने पर यह सब सामान दे दिया है और अब मैं आपको और परेशान नहीं करूंगा| शिव जी ने कहा ठीक है बेटा यह तुम्हारी बहन है तो तुम आप हमारे घर आए जाओगे तो एक भाई के नाते आप और आने वाले रक्षाबंधन पर राखी बनवाना और इसकी रक्षा का वचन लेना जब वास्तविकता का पता उस लड़की पता चली तो वह हक्का बक्का रह गई लड़की ने उससे पूछा कि तुमने ऐसा कहा है तो उसने बतलाइए कि मैं यह सब नहीं जानता मैं किसी को नहीं जब इस तरह की स्थिति बनी बहुत ज्यादा परेशान हो गए और उन्होंने मामला महिला पुरुष पुलिस को दिया उसने लड़की से कबुल कर वाया उसने कहा कि” यह सब मेरी गलती है मैं ही प्यार में अंधे होकर अपना घर का सामान बाहर देती रही अभी बाहर वाले जो मुझे अपना कहते थे सहारा नहीं दे रहे हैं मुझसे गलती हुई अब पिताजी मैं भविष्य में कभी गलती नहीं करूंगी आपको मैं एक अच्छी लड़की बंद कर देख लाऊंगी|”

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